मुंबई(ईएमएस)। मालेगांव बम धमाके के सभी सात आरोपियों की अदालत से रिहाई के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने इस निर्णय पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, मैं अनुरोध करता हूं कि भगवा आतंकवाद शब्द का प्रयोग न करें। अगर करना ही है तो ‘सनातनी आतंकी’ या ‘हिंदू आतंकी’ कहें। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कहा कि असल में आतंकवाद का कोई धर्म या जाति नहीं होती। उन्होंने आरोप लगाया कि इस केस को जानबूझकर कमजोर किया गया और इसकी निष्पक्ष जांच नहीं हुई। चव्हाण ने कहा, मालेगांव में विस्फोट तो किसी ने किया ही था। मुझे पहले से ही अंदेशा था कि इस केस का यही नतीजा होगा, क्योंकि यह मामला यूपीए सरकार के समय शुरू हुआ था और फिर बीजेपी सत्ता में आ गई। एनआईए ने इस केस को कमजोर किया। एनआईए किसके नेतृत्व में काम कर रही है?चव्हाण ने आतंकवाद से जुड़े मामलों में जवाबदेही की कमी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा, अगर जिन लोगों को बरी किया गया है उन्होंने धमाका नहीं किया, तो फिर किया किसने? यही हाल ट्रेन ब्लास्ट केस में भी हुआ। उन लोगों के परिवारों को क्या जवाब देंगे जिन्होंने अपने परिजन खोए?इस दौरान चव्हाण ने भगवा आतंकवाद शब्द के उपयोग पर भी टिप्पणी की। उनकी इस टिप्पणी से राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। विपक्षी दलों ने चव्हाण पर सांप्रदायिक भावना भड़काने का आरोप लगाया है।29 सितंबर, 2008 को महाराष्ट्र के मालेगांव शहर में हुए बम विस्फोट में 6 लोगों की मौत और 100 से अधिक लोग घायल हुए थे। मामले की जांच में कई बार मोड़ आए और मुकदमा 17 साल तक चला। अंततः सभी सातों आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया। वीरेंद्र/ईएमएस/01अगस्त2025