व्यापार
30-Aug-2025
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- कंपनी का करीब 70 प्रतिशत निर्यात अकेले अमेरिका में - कंपनी के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ी - शेयर बाजार में भारी गिरावट, 60 से 27 रूपये पहुंची कीमत नई दिल्ली (ईएमएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 50 प्रतिशत टैरिफ से भारतीय टेक्सटाइल कंपनियों को भारी नुक्सान हुआ है। भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा टेक्सटाइल उत्पादक देश है। टेक्सटाइल और परिधान उद्योग का 2024 में बाजार आकार लगभग 146.55 अरब यूएस डॉलर का था और 2030 तक 350 अरब यूएस डॉलर तक पहुँचने का अनुमान लगाया जा रहा था। लेकिन अमेरिकी टैरिफ ने इस विकास यात्रा को बड़ा झटका दिया है। देश की जानी मानी टेक्सटाइल कंपनी ट्राइडेंट अमेरिका में होम टेक्सटाइल (बाथ व बेड लिनेन) का निर्यात बड़ी मात्रा में करती है। अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ के चलते गंभीर संकट में फंस गई है। अमेरिका ट्राइडेंट ग्रूप के लिए सबसे बड़ा निर्यात बाजार है और कंपनी का करीब 70 प्रतिशत होम टेक्सटाइल (बाथ और बेड लिनेन) निर्यात अकेले अमेरिका में होता है। अन्य देशों में 20 प्रतिशत और भारत के घरेलू बाजार में लगभग 10 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। ट्राइडेंट अपने उत्पादों का निर्यात 150 देशों में करता है, जो एशिया, यूरोप, अमेरिका, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अमेरिका जैसे छह महाद्वीपों तक फैला हुआ है। कंपनी के कुल राजस्व का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा निर्यात से आता है, जिसमें अमेरिका की हिस्सेदारी सबसे बड़ी है। 50 प्रतिशत टैरिफ का असर अब मध्यप्रदेश की टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर साफ दिखने लगा है। राज्य के मंडीदीप और बुधनी लंबे समय से भारत के प्रमुख टेक्सटाइल हब माने जाते हैं। यहां से न सिर्फ घरेलू बाजार बल्कि बड़े पैमाने पर निर्यात भी होता है। ट्राइडेंट के साथ वर्धमान, अनंत स्पिनिंग और सागर मैन्युफैक्चरर्स जैसी कंपनियां अमेरिका में बड़े स्तर पर टेक्सटाइल निर्यात करती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ से ट्राइडेंट ग्रूप की लागत बढ़ जाएगी और अमेरिकी बाजार में इसकी प्रतिस्पर्धा क्षमता कमजोर होगी। इससे न केवल निर्यात प्रभावित होगा बल्कि कंपनी की आय और लाभांश पर भी बड़ा असर पड़ेगा। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि इस झटके के तुरंत बाद भारतीय शेयर बाजार में ट्राइडेंट ग्रूप के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई। ट्राइडेंट के शेयर वर्ष 2022 में जहां 60 रूपये तक पहुंच गए थे जबकि आज उनकी कीमत 27 रूपये रह गई है। निवेशकों में घबराहट फैल गई है और कंपनी के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। ट्राइडेंट ग्रूप पहले से ही अमेरिका पर अत्यधिक निर्भर रहा है। वैश्विक व्यापार नीति का असर ट्राइडेंट ग्रूप के भविष्य पर सवाल खड़े कर रहा है। अब कंपनी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने निर्यात को डाइवर्सिफाइड करने और यूरोप, एशिया और अन्य वैश्विक बाजारों में हिस्सेदारी बढ़ाने की होगी, ताकि अमेरिकी दबाव का असर कम किया जा सके। उद्योग जगत के जानकार मानते हैं कि आने वाले महीनों में ट्राइडेंट ग्रूप को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करना होगा। सौरभ जैन