हैदराबाद,(ईएमएस)। निजी क्षेत्र के अंतरिक्ष उद्योग को नई उड़ान देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए स्काईरूट एयरोस्पेस के इंफिनिटी कैंपस का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने कंपनी के पहले ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 का भी अनावरण किया, जो उपग्रहों को कक्षा में स्थापित करने की क्षमता रखता है। लगभग 2 लाख वर्ग फुट क्षेत्र में फैले इस अत्याधुनिक कैंपस में लॉन्च वाहनों का डिजाइन, विकास, एकीकरण और परीक्षण होगा, जिसमें हर महीने एक ऑर्बिटल रॉकेट बनाने की क्षमता है। स्काईरूट के संस्थापक पवन चंदन और भरत ढाका, दोनों आईआईटी के पूर्व छात्र और इसरो के पूर्व वैज्ञानिक, ने 2022 में सब-ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-एस लॉन्च कर इतिहास रचा था। पीएम मोदी ने कहा, इंफिनिटी कैंपस नई सोच, नवाचार और युवा शक्ति का प्रतीक है। भारत अब बड़े सपने देख रहा है, बड़ा कर रहा है और सर्वश्रेष्ठ दे रहा है। उन्होंने अंतरिक्ष क्षेत्र के ऐतिहासिक सुधारों का जिक्र करते हुए बताया कि 2023 से निजी खिलाड़ियों को खोलने से 300 से अधिक स्टार्टअप उभरे हैं। ये युवा इंजीनियर प्रणोदन प्रणाली, समग्र सामग्री और उपग्रह प्लेटफॉर्म जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे हैं, जो वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षक बना रहे हैं। मोदी ने इसरो की विश्वसनीयता की सराहना की और कहा कि अंतरिक्ष अब संचार, कृषि, मौसम पूर्वानुमान और राष्ट्रीय सुरक्षा का आधार है। आईएन-स्पेस की स्थापना से इसरो की सुविधाएं स्टार्टअप्स को उपलब्ध हुई हैं। इंडियन स्पेस एसोसिएशन के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल एके भट्ट (सेवानिवृत्त) ने कहा, विक्रम-I और इंफिनिटी कैंपस न्यूस्पेस विजन को मजबूत करेगा। यह इसरो पर बोझ कम कर राष्ट्रीय क्षमता बढ़ाएगा। विक्रम-I 300 किग्रा पेलोड को लो अर्थ ऑर्बिट में ले जा सकता है और अगले दो महीनों में लॉन्च की तैयारी है। कार्यक्रम में एक और बड़ा ऐलान हुआ। पीएम ने कहा कि परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को जल्द निजी कंपनियों के लिए खोला जाएगा, जो 1962 के एक्ट के राज्य एकाधिकार को तोड़ेगा। 1 दिसंबर से शुरू हो रहे शीतकालीन सत्र में परमाणु ऊर्जा विधेयक, 2025 पेश किया जाएगा। वर्तमान 8.8 गीगावॉट क्षमता को 2047 तक 100 गीगावॉट करने का लक्ष्य है। मोदी ने जोर दिया, यह छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों उन्नत रिएक्टरों और नवाचार में अवसर पैदा करेगा। इससे ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी नेतृत्व मजबूत होगा। यह सुधार अंतरिक्ष क्षेत्र की तरह निजी नवाचार को बढ़ावा देंगे। भारत के पास विशेषज्ञ इंजीनियर, उच्च गुणवत्ता विनिर्माण और नवाचार मानसिकता है, जो दुनिया के चुनिंदा देशों में ही पाई जाती है। आने वाले वर्षों में ये कदम भारत को वैश्विक स्पेस और एनर्जी पावरहाउस बनाएंगे। वीरेंद्र/ईएमएस 29 नवंबर 2025