ज़रा हटके
30-Nov-2025
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-नूर ने चाय भरते समय कप में पहले दूध डालकर पहचान खतरे में डाली बर्लिन,(ईएमएस)। फिल्मों और वेब सीरीज में जासूसों की लाइफ स्टाइल बड़ी दिलचस्प होती है, लेकिन रियल लाइफ में जान हथेली पर लेकर घूमने वाले ये जाजूस अकसर देश के इतिहास से भुला दिए जाते हैं। ऐसा ही उन महिला जासूसों के साथ हुआ जिन्होंने दुनिया के खूंखार जवानों को अपनी उंगलियों पर नचाया था। किसी को कानों-कान खबर तक नहीं हुई। इनमें से एक जासूस का राज चाय के कप से खुल। एसओई जो 1940 से 1946 तक सक्रिय रही, यह एक ब्रिटिश सीक्रेट सर्विस थी, जो आम नागरिकों से जासूस चुनती थी, जिनमें महिलाएं भी शामिल होती थीं। इन्हें ट्रेनिंग दी जाती थी और इसके बाद इन बहादुर महिलाओं को नाजी-कब्जे वाले यूरोप, विशेष रूप से फ्रांस भेजा जाता था। भले ही वे फ्रांसीसी नहीं थीं, वे फ्रेंच बेहतरीन तरीके से बोलती थीं और लोगों की तरह दिखने की कोशिश करती थीं। इन्हीं जासूसों में से एक आयरिश एजेंट मौरीन पैट्रिशिया ‘पैडी’ ओ’सुलीवन थीं, जो बेल्जियम में पली-बढ़ी थीं। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि उन्होंने बड़ी चालाकी से एक जर्मन सैनिक को अपने बैग की तलाशी लेने से रोक दिया। इस बैग में एजेंसी से जुड़े दस्तावेज रखे थे, जो अगर नाजियों के हाथ लग जाते तो तबाही निश्चित थी। इसके अलावा एजेंट यवोन कोरमेउ भी थीं, जिन्होंने युद्ध की शुरुआत में बमबारी में पति को खोने के बाद एसओई ज्वाइन किया था। वो कहती थीं कि ‘हमने डर के साथ जीना सीख लिया था। एक और एसओई महिला जासूस नूर इनायत खान के किस्से भी काफी दिलचस्प हैं, जिनका कोड नाम मैडलिन था। वह भारतीय और अमेरिकी माता-पिता की मुस्लिम पुत्री थीं, वो दो बार फंसी पहली बार नूर इनायत खान ने पेरिस के पास चाय डालते समय अपने कप में पहले दूध डालकर अपनी पहचान खतरे में डाल दी, जिससे एक पड़ोसी ने उन्हें ब्रिटिश महिला समझ लिया। इसके बाद गेस्टापो से बचने के लिए उन्होंने बालों को ब्लीच करके सुनहरा कर लिया था, जो चाल उल्टी पड़ गई थी और वह जर्मन सैनिकों की नजर में आ गई थीं। उन्हें 1944 में डाचाऊ यातना शिविर में टॉर्चर करके मार दिया गया था। सिराज/ईएमएस 30 नवंबर 2025