व्यापार
30-Nov-2025
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आखिरकार गूगल ने लगाई लॉटरी! नई दिल्ली(ईएमएस)। गूगल में नौकरी का सपना देखने वालों के लिए अभिजय अरोड़ा की कहानी किसी मिसाल से कम नहीं। स्विट्जरलैंड में 90 लाख रुपये सालाना पैकेज वाली शानदार नौकरी कर रहे अभिजय ने एक दिन सब कुछ दांव पर लगा दिया। वजह? वे हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से एमबीए करना चाहते थे। हाई-पेइंग जॉब छोड़कर उन्होंने हार्वर्ड में दाखिला लिया। उन्हें यकीन था कि दुनिया की नंबर-1 बिजनेस स्कूल की डिग्री मिलते ही टॉप कंपनियां लाइन लगाकर ऑफर देंगी। लेकिन हकीकत इसके ठीक उलट निकली। एमबीए पूरा होने के बाद शुरू हुआ असली संघर्ष। अभिजय को लगा था कि उनका करियर रॉकेट की तरह ऊपर जाएगा, मगर छह महीने तक एक भी जॉब नहीं मिली। उन्होंने खुद सोशल मीडिया पर खुलासा किया कि इन छह महीनों में उन्होंने लगभग 400 कंपनियों में आवेदन किया और हर जगह से रिजेक्शन ही मिला। लगातार असफलता ने उन्हें नकारात्मकता के गहरे समंदर में धकेल दिया। कई बार लगा कि शायद यह रिस्क लेना गलती थी। कई राउंड्स के कठिन इंटरव्यू के बाद आखिरकार गूगल (यूट्यूब) ने उन्हें प्रोडक्ट मैनेजर की जिम्मेदारी सौंपी। अभिजय बताते हैं कि इस बार उन्होंने अपनी पूरी स्ट्रैटेजी बदली – रिज्यूमे में बड़े बदलाव किए, लिंक्डइन प्रोफाइल को प्रोफेशनल बनाया, पुराने प्रोजेक्ट्स को नए सिरे से हाईलाइट किया और इंटरव्यू की तैयारी इतनी जबरदस्त की कि हर सवाल का जवाब पहले से तैयार था। आज अभिजय अरोड़ा गूगल में काम कर रहे हैं और उनकी यह पोस्ट लाखों युवाओं को इंस्पायर कर रही है। उनका संदेश साफ है – सपना जितना बड़ा होगा, रास्ता उतना ही मुश्किल होगा। लेकिन अगर हार नहीं माने तो एक दिन गूगल भी फोन करेगा। 90 लाख छोड़े, हार्वर्ड गए, 400 रिजेक्शन खाए और फिर गूगल पहुंच गए – यह है अभिजय अरोड़ा की स्ट्रगल-टू-सक्सेस स्टोरी, जो बता रही है कि सही समय पर सही रिस्क और लगन कभी खाली नहीं जाती। वीरेंद्र/ईएमएस 30 नवंबर 2025