राष्ट्रीय
31-Dec-2025
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नई दिल्ली,(ईएमएस)। मनरेगा एक ऐसी योजना है जो ग्रामीण इलाकों में लोगों को काम की गारंटी देती है। इसका मकसद ग्रामीण परिवारों की आय बढ़कर आत्मनिर्भर बनाना है। लेकिन योजना को लेकर चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। मनरेगा के तहत काम पाने वाले परिवारों में से सिर्फ 8 प्रतिशत से भी कम को पिछले 3 वित्तीय सालों में गारंटी वाले 100 दिन का काम मिला है। यह जानकारी एक सरकारी प्रेजेंटेशन में संसदीय समिति की बैठक में दी गई। इसमें बताया गया कि बीते तीन वित्तीय सालों में हर परिवार को औसतन करीब 50 दिन का ही रोजगार मिला। हालांकि, यह सामने आया कि ग्रामीण रोजगार योजना में अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के साथ-साथ महिलाओं की भागीदारी उनकी आबादी में हिस्सेदारी से कहीं ज्यादा रही। जो लोग इन चर्चाओं से वाकिफ हैं, उन्होंने ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से साझा आंकड़ों का हवाला देकर बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में एससी/एसटी की हिस्सेदारी 36 प्रतिशत से ज्यादा और महिलाओं की हिस्सेदारी 56 प्रतिशत से ज्यादा है। यह आंकड़े पिछले तीन वित्तीय सालों के आंकड़ों के करीब ही हैं। इस साल हर परिवार को औसतन 36 दिन का रोजगार मिला है। यह संख्या वित्तीय वर्ष के अंत तक बढ़ने की उम्मीद है। पिछले तीन सालों में यह आंकड़ा 47 से 52 दिनों के बीच रहा। सूत्रों के मुताबिक, इन तीन सालों में रोजगार पाने वाले परिवारों की संख्या लगभग 5.8 करोड़ (2024-25), करीब 6 करोड़ (2023-24) और 6.2 करोड़ (2022-23) रही। वहीं, जिन परिवारों को 100 दिन का काम मिला, उनकी संख्या क्रमशः 40.7 लाख (7 प्रतिशत), 45 लाख (7.5 प्रतिशत) और 36 लाख (5.8 प्रतिशत) रही। इस मामले पर कांग्रेस सदस्य ने सरकार पर फंड में कटौती करने और पैसे जारी करने में देरी करने का आरोप लगाया। वहीं, भाजपा सदस्यों ने कुछ राज्यों में वित्तीय अनियमितताओं का मुद्दा उठाकर मंत्रालय से इस बारे में जानकारी मांगी। नए कानून की जरूरत क्यों? केंद्र सरकार का कहना है कि अनुभव को ध्यान में रखते हुए एक नया कानून लाया गया है, जो कार्यान्वयन ढांचे को मजबूत करेगा। संसदीय समिति की बैठकें, जिनकी अध्यक्षता कांग्रेस सांसद सप्तगिरी उल्का कर रहे थे, ज्यादातर मनरेगा पर केंद्रित रहीं। इससे पहले, समिति का एजेंडा पुराने कानून की तुलना वीबी-जी राम जी एक्ट से करना था, जिस पर कुछ भाजपा सदस्यों ने आपत्ति जाहिर की थी। आशीष/ईएमएस 31 दिसंबर 2025