राष्ट्रीय
01-Jan-2026
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नई दिल्ली(ईएमएस)। देश की सीमाओं पर मौजूद सुरक्षा चुनौतियों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बने हुए जटिल हालातों के बीच बुधवार का दिन भारतीय सशस्त्र सेनाओं के इतिहास में मील के पत्थर के समान है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने 31 दिसंबर को दिन में करीब 10 बजे ओडिशा तट के पास स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज (आईटीआर) से एक ही लांचर से दो प्रलय मिसाइलों का एक साथ सफल परीक्षण किया है। यह मिसाइल स्वदेशी रूप से विकसित ठोस प्रणोदक अर्ध-बैलिस्टिक मिसाइल है। जिसमें उच्च-भेदक क्षमता सुनिश्चित करने के लिए अत्याधुनिक मार्गदर्शन और नेविगेशन तकनीक का उपयोग किया गया है। प्रलय मिसाइल विभिन्न लक्ष्यों तक कई प्रकार की युद्धक सामग्री ले जाने में सक्षम है। रक्षा मंत्रालय ने एक बयान के जरिए यह जानकारी दी है। जिसमें बताया कि परीक्षण के दौरान डीआरडीओ, वायुसेना, सेना और अन्य साझेदारों के प्रतिनिधि मौजूद थे। मंत्रालय ने कहा कि इस परीक्षण की रेंज में मौजूद ट्रैकिंग सेंसरों से व्यापक निगरानी की गई। उन्होंने भी इसकी सफलता की पुष्टि करते हुए कहा कि दोनों मिसाइलों ने निर्धारित पथ का अनुसरण करते हुए उड़ान से जुड़े सभी उद्देश्यों को पूरा किया है। इसके अलावा परीक्षण बिंदुओं के पास तैनात जहाज पर लगे टेलीमेट्री सिस्टम से भी इसकी सफलता की पुष्टि हुई है।रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बेहद कम अंतर पर किए गए मिसाइलों के सफल परीक्षण को लेकर डीआरडीओ, वायुसेना, सेना, रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम और उद्योग जगत की सराहना की है। उन्होंने कहा कि प्रलय मिसाइल के साल्वो परीक्षण ने इसकी विश्वसनीयता को स्थापित कर दिया है। रक्षा विशेषज्ञों की भाषा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि साल्वो परीक्षण का अर्थ होता है, एक साथ या बहुत कम अंतर पर कई हथियारों से हमला। वहीं, डीआरडीओ अध्यक्ष डॉ.समीर.वी.कामत ने भी संगठन की पूरी टीम को इस सफलता की बधाई देते हुए कहा कि ये उपलब्धि उपयोगकर्ताओं के लिए मिसाइल प्रणाली के शीघ्र शामिल होने की तैयारी का इशारा है। प्रलय मिसाइल को भारत ने मिसाइल प्रणाली और वैमानिकी की उन्नत प्रौद्योगिकी पर काम करने वाले हैदराबाद स्थित इमारत अनुसंधान केंद्र ने डीआरडीओ की अन्य प्रयोगशालाओं रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला, उन्नत प्रणाली प्रयोगशाला, शस्त्र अनुसंधान-विकास प्रतिष्ठान, उच्च ऊर्जा सामग्री अनुसंधान प्रयोगशाला, रक्षा धातुकर्म अनुसंधान प्रयोगशाला, टर्मिनल बैलिस्टिक अनुसंधान प्रयोगशाला, अनुसंधान-विकास प्रतिष्ठान (इंजीनियर) और एकीकृत परीक्षण रेंज) विकास सह उत्पादन साझेदारों और अन्य भारतीय उद्योगों के सहयोग से विकसित किया है। वहीं, परीक्षणों के लिए दोनों विकास सह-उत्पादन साझेदारों ने प्रणालियों को एकीकृत किया। वीरेंद्र/ईएमएस/01 जनवरी 2026 --------------------------------------