राज्य
01-Jan-2026


इन्दौर (ईएमएस) विगत दिनों इन्दौर नगर निगम में पकड़ाए 150 करोड़ के फर्जी बिल घोटाले में ईओडब्ल्यू ने शिकायत कर्ता अधिकारी की मौत के बाद भी जांच को आगे बढ़ाने का कहा है। ईओडब्ल्यू का कहना है कि शिकायत दर्ज हो चुकी है जिसके चलते अब जांच को रोका नहीं जा सकता। ईओडब्ल्यू के पास शिकायत के साथ दिए गए कई अहम दस्तावेज मौजूद हैं, जिनके आधार पर निगम के ऑडिट विभाग में पदस्थ अधिकारी के खिलाफ जांच शुरू कर दी गई है। ईओडब्ल्यू के अनुसार 150 करोड़ के नगर निगम में हुए इस घोटाले में अर्पिता उमड़ेकर की शिकायत पर अब जांच शुरू की गई है। साल 2022 के पहले हुए इस घोटाले में ठेकेदारों ने अधिकारी-कर्मचारियों की मिलीभगत से उन कामों के दस्तावेज और बिल तैयार कर पेमेंट ले लिया जो काम नगर निगम में हुए ही नहीं थे। इस पूरे घोटाले का मास्टर माइंड इंजीनियर अभय राठौर है जो कि अभी जेल में है। अभय राठौर ने नगर निगम में असिस्टेंट इंजीनियरों के नाम से फर्जी फाइलें बनाई। फिर इसमें फर्जी वर्कऑर्डर हुए। फिर एग्जीक्यूटिव इंजीनियरों और सुपरवाइजिंग इंजीनियरों के साइन हुए। इसी कड़ी में अपर कमिश्नर के भी फर्जी साइन हुए। नगर निगम के ऑडिट विभाग से रिटायर्ड अर्पिता उमड़ेकर ने करीब पांच साल पहले निगम में पदस्थ शरद कतरोलिया, सहायक संचालक स्थानीय निधि संपरीक्षा के खिलाफ आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) में इसकी शिकायत की थी। जिस पर ईओडब्ल्यू ने शिकायत के साथ लगाए गए भ्रष्टाचार से जुड़े दस्तावेजों की जांच के बाद अब जाकर औपचारिक जांच शुरू की है। जबकि शिकायतकर्ता अर्पिता उमड़ेकर की मौत हो चुकी है। मामले में अब उनके पति विलास उमड़ेकर न्याय की मांग कर रहे हैं। ईओडब्ल्यू की एएसपी नंदिनी शर्मा के अनुसार शिकायत को विधिवत रजिस्टर किया गया है और जांच लगातार जारी है। उन्होंने कहा शिकायतकर्ता ने पर्याप्त दस्तावेज दिए हैं। उनकी मृत्यु की जानकारी हमें बाद में लगी, लेकिन इससे केस की जांच पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। ईओडब्ल्यू को शिकायतकर्ता की मौत का पता तब चला जब उन्हें बयान देने के लिए दो बार पत्र भेजे इसके बाद ईओडब्ल्यू के अधिकारी स्वयं उनके घर बयान लेने पहुंचे थे। तब उन्हें शिकायतकर्ता अर्पिता उमड़ेकर के पति विलास उमड़ेकर ने बताया कि अर्पिता का निधन हो चुका है। मामले में विलास उमड़ेकर ने कहा है कि उनकी पत्नी नगर निगम के ईमानदार कर्मचारियों में गिनी जाती थीं। उन्होंने आरोप लगाते बताया कि वरिष्ठ अधिकारी उन पर कमीशनखोरी के लिए दबाव डालते थे, लेकिन उसने कभी भ्रष्टाचार में उन्हें सहयोग नहीं किया। विलास उमडेकर का कहना है कि अर्पिता अपने खिलाफ कार्रवाई से डरती थीं। इसी वजह से नौकरी से रिटायर होने के बाद उन्होंने वरिष्ठ अधिकारी शरद कतरोलिया के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के साथ उन्होंने भ्रष्टाचार से जुड़े अहम दस्तावेज भी लगाए थे। जिसके आधार पर ही ईओडब्ल्यू जांच कर रही है। विलास उमड़ेकर का कहना है कि मेरी पत्नी भ्रष्टाचार के खिलाफ न्याय के लिए लड़ रही थीं। अगर जांच में अधिकारी दोषी पाया जाता है, तो उस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। आनन्द पुरोहित/ 01 जनवरी 2026