नई दिल्ली(ईएमएस)। भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर सुरक्षा चुनौतियों और पाकिस्तान की छद्म युद्ध रणनीति को लेकर रक्षा मंत्रालय ने बुधवार को एक विस्तृत वार्षिक समीक्षा रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में जम्मू-कश्मीर, पंजाब और राजस्थान से लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा पर ड्रोन घुसपैठ की कुल 791 घटनाएं दर्ज की गईं। इन आंकड़ों ने सीमा पार से होने वाली तकनीकी साजिशों की गंभीरता को उजागर किया है। मंत्रालय के मुताबिक, घुसपैठ की इन घटनाओं में से 9 मामले जम्मू-कश्मीर में, जबकि सर्वाधिक 782 घटनाएं पंजाब और राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों में दर्ज की गई हैं। पाकिस्तान की इन हरकतों का जवाब देने के लिए भारतीय सेना ने पश्चिमी मोर्चे पर स्पूफर और जैमर तकनीक का प्रभावी उपयोग किया, जो ड्रोन के खतरे को काफी हद तक नियंत्रित करने में सफल रहा। इस अवधि के दौरान भारतीय सेना ने कुल 237 ड्रोनों को मार गिराने में सफलता हासिल की। इनमें से 5 ड्रोन खतरनाक विस्फोटकों से लैस थे, 72 ड्रोनों के जरिए मादक पदार्थों की तस्करी की जा रही थी, जबकि 161 ड्रोन बिना किसी पेलोड के टोह लेने के उद्देश्य से भेजे गए थे। रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा स्थिति अब पूरी तरह नियंत्रण में है। सरकार और सेना की साझा पहलों के कारण हिंसा के स्तर में भारी कमी आई है, विरोध प्रदर्शन थमे हैं और पत्थरबाजी जैसी घटनाएं अब बीते दौर की बात हो गई हैं। समीक्षा वक्तव्य में यह भी उल्लेख किया गया कि पाकिस्तान ने पुंछ-राजौरी क्षेत्र को छद्म युद्ध का केंद्र बनाने की कोशिश की थी, लेकिन भारतीय सेना के मजबूत घुसपैठ-विरोधी ग्रिड और निरंतर अभियानों ने आतंकवादियों के इरादों को पस्त कर दिया है। 2019 के बाद से घाटी के भीतरी इलाकों में भी सुरक्षा की स्थिति में निरंतर सुधार हुआ है। हालांकि, पाकिस्तान अब भी अंतरराष्ट्रीय सीमा का लाभ उठाकर ड्रोन के माध्यम से न केवल हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी कर रहा है, बल्कि बड़ी संख्या में आतंकवादियों की घुसपैठ कराने के अपने दृढ़ इरादे पर कायम है। मौजूदा परिचालन संबंधी चिंताओं को देखते हुए भारत सरकार ने सैन्य क्षमताओं के आधुनिकीकरण पर जोर दिया है। ड्रोन और ड्रोन-रोधी प्रणालियों, सटीक गोला-बारूद और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों की आपातकालीन खरीद को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देते हुए सेना की बेस कार्यशालाओं में स्वदेशी ड्रोन निर्माण की अत्याधुनिक क्षमता स्थापित की गई है। अब तक ईएमई इकाइयों द्वारा निगरानी और आत्मघाती हमलों में सक्षम कुल 819 ड्रोन तैयार किए जा चुके हैं। वहीं, संसद में साझा किए गए डेटा के अनुसार, भारत-बांग्लादेश सीमा पर घुसपैठ की कोशिशें अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। 2025 में नवंबर तक इस सीमा पर घुसपैठ के 1,104 मामले सामने आए, जबकि भारत-पाकिस्तान सीमा पर इसी अवधि में 32 मामले दर्ज किए गए। राहत की बात यह रही कि भारत-चीन सीमा पर घुसपैठ का कोई भी मामला सामने नहीं आया। गृह मंत्रालय ने आश्वस्त किया है कि भारत की सभी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर लगातार निगरानी और आधुनिक तकनीक के माध्यम से कड़ी मॉनिटरिंग की जा रही है ताकि देश की अखंडता अक्षुण्ण रहे। वीरेंद्र/ईएमएस/01जनवरी2026