01-Jan-2026
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2026 तक 1200 लोग भेजे जाएंगे, 2030 तक पूरे समुदाय की होगी घर वापसी नई दिल्ली,(ईएमएस)। मणिपुर और मिजोरम में बसे ब्नेई मेनाशे समुदाय के करीब 5,800 लोगों की इजराइल वापसी की प्रक्रिया शुरू हो रही है। इजराइली कैबिनेट ने 250 करोड़ रुपए की योजना को मंजूरी दिए जाने के बाद चरणबद्ध तरीके से समुदाय को वापस इजराइल ले जाया जाएगा। 2026 तक समुदाय के 1,200 लोग इजराइल भेजे जाएंगे। जबकि, 2030 तक पूरी घर वापसी का लक्ष्य रखा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पूर्वोत्तर भारत की पहाड़ियों में बसा यह समुदाय खुद को दस खोई हुई जनजातियों में से मेनाशे का वंशज मानता है। 2700 साल पहले असिरियन निर्वासन के बाद वे पूर्व की ओर बढ़े और अंत में भारत में बस गए। इजराइल सरकार की नई योजना से उनकी घर वापसी हो रही है। हालांकि इसके पीछे मणिपुर की जातीय हिंसा की त्रासदी भी छिपी बताई जा रही है। इजराइल में 1950 के दशक में दुनियाभर में यहूदी जड़ों की खोज शुरू हुई थी। इसके तहत 2005 में इजराइल के मुख्य रब्बी श्लोमो अमर ने यहूदी परंपराओं का पालन करने वाले इस समुदाय को धार्मिक मान्यता दी। रिपोर्ट के मुताबिक इजराइल इसे धार्मिक पुनर्मिलन मानता है। इसके अलावा उसकी योजना इस समुदाय को गलील क्षेत्र में बसाने की है जिससे उसकी उत्तरी सीमा मजबूत होगी। ऐसे में आस्था, सुरक्षा और रणनीतिक अहमियत की संभावना के कारण ब्नेई मेनाशे को प्राथमिकता दी गई है। इजराइल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे अहम जियोनिस्ट फैसला बताया है। भारत से जाने वाले इन सदस्यों को इजराइल में शांति व सुकून की उम्मीद है। मिजोरम के कम्युनिटी लीडर कहते हैं कि हम प्रॉमिस्ड लैंड लौट रहे हैं। हिंसा ने हमें मजबूर किया, पर यह हमारी जड़ों की पुकार है। एक युवा सदस्य ने कहा कि यहां सुरक्षा नहीं, इजराइल में परिवार मिलन, नौकरी, आवास और हिब्रू शिक्षा मिलेगी। सिराज/ईएमएस 01जनवरी26