क्षेत्रीय
01-Jan-2026
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- आरोपियो में कंपनी प्रोपराइटर, बैंक मैनेजर, पैनल एडवोकेट और गांरटर शामिल - चारो के खिलाफ ईओडब्ल्यू ने कसा शिकंजा भोपाल/बीना(ईएमएस)। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) द्वारा केनरा बैंक ब्रॉच नवलखा के साथ 2 करोड 56 लाख की धोखाधडी के मामले की जॉच के बाद मेसर्स लक्ष्य इक्विपमेंट एण्ड इंजीनियरिंग के प्रोपरायटर, बैंक के ब्रांच मैनेजर सहित पैनल एडवोकेट के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। कंपनी के प्रोपरायटर और गांरटर ने ऐसी संपत्ति को गिरवी रखा जो पहले ही बिक चुकी थी। वहीं मामले में बैंक मैनेजर और पैनल एडवोकेट की भी मिली भगत सामने आई। - यह था मामला विभाग द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार मेसर्स लक्ष्य इक्विपमेंट एण्ड इंजीनियरिंग की प्रोपराइटर नेहा ताम्बी पत्नी मनीष ताम्बी द्वारा विनिर्माण इकाई प्लॉट नंबर 311, इंडस्ट्रियल ग्रोथ सेंटर, पीथमपुर, जिला धार में शीट मेटल कार्यों के विनिर्माण हेतु गारंटर मनीष ताम्बी के साथ 3 अक्टूबर 2020 को केनरा बैंक, नवलखा शाखा में 1 करोड़ 70 लाख रुपये की ओ.सी.सी. लिमिट हेतु आवेदन प्रस्तुत किया गया। इस लोन के लिये नेहा ताम्बी और मनीष ताम्बी द्वारा संयुक्त नाम से फ्लैट नंबर 402, क्लासिक क्राउन, प्लॉट क्रमांक 5/2, ओल्ड पलासिया, इंदौर की रजिस्ट्री 29 नवंबर 2002 को कोलेटरल बंधक के रूप में प्रस्तुत की गई। लोन की मंजूरी के क्रम में केनरा बैंक के तत्कालीन ब्रांच मैनेजर पवन कुमार झा द्वारा संपत्ति एवं विनिर्माण इकाई का निरीक्षण कर 3 अक्टूबर 2020 को विजिट रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जिसमें संपत्ति विवाद रहित एवं यूनिट संचालित होना बताया गया। - बंधक और सीज किये फ्लैट के बनाये फर्जी दस्तावेज प्रकरण की जॉच में सामने आया की केनरा बैंक के तत्कालीन पैनल एडवोकेट विकास कुमार वर्मा द्वारा प्रस्तुत लीगल स्क्रूटनी रिपोर्ट में तथ्यों को छुपाते हुए उक्त संपत्ति को वैध एवं बंधक योग्य दर्शाया गया। वहीं यह भी सामने आया की जिस फ्लैट को केनरा बैंक में कोलेटरल के रूप में बंधक बताया गया था, वह संपत्ति साल 2007 में ही बेचा जा चुका था। और वह फ्लैट पहले से ही बैंक ऑफ इंडिया, कंचन बाग शाखा में बंधक होकर एन.पी.ए. घोषित होने पर सीज किया जा चुका था। इसके बाद उसी संपत्ति के फर्जी दस्तावेजों का उपयोग कर केनरा बैंक से लोन प्राप्त किया गया। यह भी सामने आया की विजिट रिर्पोट में संचालित बताया गया व्यवसायिक यूनिट अस्तित्व में नहीं है, तथा ओ.सी.सी. खाते से संदिग्ध लेन-देन कर रकम का डायवर्जन किया गया है। मेसर्स लक्ष्य इक्विपमेंट एण्ड इंजीनियरिंग के खाते से मेसर्स ब्लू चिप इक्विपमेंट एण्ड इंजीनियरिंग प्रा.लि. के खाते में राशि स्थानांतरित की गई, जिसमें मनीष ताम्बी डायरेक्टर हैं, तथा दोनों फर्मों का व्यवसायिक पता समान पाया गया। - इनके खिलाफ दर्ज हुआ मामला जॉच के बाद ईओडब्ल्यू ने नेहा तांबी, मेसर्स लक्ष्य इक्युपमेंट एण्ड इंजिनियरिंग (प्रोपराइटर), मनीष ताम्बी पिता भूपेन्द्र ताम्बी (ग्यारंटर), पवन कुमार झा (तात्कालीन बैंक प्रबंधक) और विकास कुमार वर्मा (पैनल एडवोकेट) के खिलाफ धारा 420,467,468,471,120 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर आगे की कार्यवाही शुरु कर दी है। जुनेद / 1 जनवरी