-चीनी मिल अपने दौर में इलाकों के किसानों के लिए वरदान थी मोतिहारी,(ईएमएस)। सरकार ने बिहार में बहार लाने की तैयारी शुरू कर दी। नीतीश सरकार ने सात निश्चय-3 के तहत बंद पड़े उद्योगों को फिर से चालू करने का फैसला लिया है। नए उद्योग स्थापित करने की योजना अब कागजों से निकलकर जमीन पर उतरती नजर आ रही है। इस कड़ी में पूर्वी चंपारण जिले की सालों से बंद चकिया स्थित बैद्यनाथ चीनी मिल को लेकर उम्मीदें एक बार फिर जगी हैं। 1990–95 के दशक से बंद इस चीनी मिल के पुनरुद्धार की संभावनाओं को टटोलने के लिए जिला अधिकारी ने मिल परिसर का जायजा लिया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक निरीक्षण में जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि मिल से जुड़ी संपत्ति, जमीन, भवन, मशीनरी और अन्य संरचनाओं की विस्तृत भौतिक रिपोर्ट तैयार की जाए। यह रिपोर्ट सीएम सचिवालय को भेजी जानी है, ताकि आगे की कार्रवाई और फैसले लिए जा सकें। माना जा रहा है कि रिपोर्ट के आधार पर यह तय होगा कि मिल को दोबारा शुरू होगी या फिर वहां किसी नए औद्योगिक प्रोजेक्ट की स्थापना की जाएगी। बैद्यनाथ चीनी मिल अपने दौर में चकिया और आसपास के इलाकों के किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं थी। सैकड़ों गांवों के किसान गन्ने की खेती पर निर्भर थे और मिल के संचालन से उन्हें समय पर भुगतान और स्थायी आय का जरिया मिलता था। मिल बंद होने के बाद इलाके की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को गहरा झटका लगा। गन्ना उत्पादक किसान धीरे-धीरे वैकल्पिक फसलों की ओर मुड़े, लेकिन उन्हें वह लाभ नहीं मिल सका जो चीनी मिल के समय मिलता था। यही वजह है कि आज किसान चाहते हैं कि एक बार फिर मिल की चिमनियों से धुआं उठे और मशीनों की आवाज सुनाई दे। मौजूदा समय में मिल परिसर में केवल खंडहरनुमा ढांचे बचे हैं। दो जर्जर गोदाम अब सिर्फ शोभा की वस्तु बनकर रह गए हैं। इसके बावजूद जानकारों का मानना है कि अगर सरकार ठोस पहल करे और निजी निवेश या सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल पर काम किया जाए, तो इस परिसर में चीनी मिल या किसी अन्य कृषि आधारित उद्योग की स्थापना संभव है। सिराज/ईएमएस 02जनवरी26