चतुर्थ वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस के शुभारंभ अवसर पर बोले मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव जबलपुर, (ईएमएस)। मानस भवन में आयोजित चतुर्थ वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कई जन्मों के पुण्य से भारत को उसका वास्तविक स्वरूप मिला है, क्योंकि यह भूमि अंधकार से प्रकाश की ओर जाने वाली सनातन संस्कृति की वाहक है। उन्होंने कहा कि जबालि ऋषि की तपोभूमि जबलपुर में अंतरराष्ट्रीय स्तर का रामायण उत्सव आयोजित होना पूरे प्रदेश और देश के लिए गौरव की बात है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन केवल एक गाथा नहीं, बल्कि मानव जीवन के लिए आदर्श आचार संहिता है। उनके आदर्शों को जीवन में उतारकर ही व्यक्ति अपने जीवन को सार्थक बना सकता है। उन्होंने कामना की कि भगवान श्रीराम के जीवन मूल्य और रामराज्य की अवधारणा देश की सीमाओं से बाहर भी जन-जन तक पहुंचे और युगों-युगों तक मानवता को दिशा प्रदान करे। राम के आदर्शों से ही संभव है जीवन की सफलता...... मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में भगवान श्रीराम के चरित्र के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि श्रीराम में अद्भुत सामर्थ्य के साथ-साथ विवेक, बुद्धिबल और मित्रता का भी अनूठा संगम था। उन्होंने कहा कि 550 वर्षों के लंबे संघर्ष के बाद अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त होना भारत की आस्था, संस्कृति और धैर्य का प्रतीक है। जबलपुर में काले पत्थर में संगमरमर ... डॉ. यादव ने जबलपुर की पवित्र धरा की सराहना करते हुए कहा कि यह संगमरमरीय शहर मां नर्मदा के पावन स्पर्श से ऐसा पवित्र हुआ है कि यहां काले पत्थर भी संगमरमर बन जाते हैं। उन्होंने वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस के आयोजन को सराहनीय बताते हुए कहा कि भविष्य में जबलपुर के साथ-साथ अन्य स्थानों पर भी इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय आयोजन किए जाएंगे। रामचरित मानस को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करने की मांग....... कार्यक्रम में जगतगुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने कहा कि वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस तभी अपने उद्देश्य में पूर्ण रूप से सफल होगी, जब संसद में रामचरित मानस को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित किया जाएगा। उन्होंने रामायण से जुड़े अनेक सारगर्भित तथ्यों पर प्रकाश डाला और वर्तमान समय की चुनौतियों के संदर्भ में रामायण की प्रासंगिकता को रेखांकित किया। डिजिटल युग में वैचारिक प्रदूषण से मुक्ति का माध्यम... कार्यक्रम के सारस्वत अतिथि केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यावरण मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने भारत की आत्मा और सनातन संस्कृति पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम के आदर्शों ने भारतीय समाज को सदियों तक जोड़े रखा है। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि डिजिटल युग में बढ़ते वैचारिक प्रदूषण को दूर करने के लिए इस तरह के आयोजन अत्यंत आवश्यक हैं। केवल श्रीराम को स्मरण करना ही नहीं, बल्कि उनके आदर्शों को जीवन में अपनाना अधिक महत्वपूर्ण है। हाइकू शैली में अनूदित गीता का विमोचन.. कार्यक्रम के दौरान एक विशेष सत्र में डॉ. अखिलेश गुमास्ता द्वारा जापान की विशिष्ट काव्य शैली ‘हाइकू’ में अनूदित श्रीमद्भगवद्गीता का विमोचन भी किया गया। यह विमोचन कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण और विशिष्ट आकर्षण रहा, जिसने भारतीय दर्शन को वैश्विक साहित्यिक शैली से जोड़ा। देश-विदेश से पहुंचे संत और विद्वान.. कॉन्फ्रेंस के संयोजक एवं अध्यक्ष अजय विष्णोई ने वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस के उद्देश्यों और स्वरूप की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने श्रीराम के चरित्र पर आधारित विश्व की विभिन्न रामायणों का उल्लेख करते हुए बताया कि यह सम्मेलन रामकथा की वैश्विक परंपरा को एक मंच पर लाने का प्रयास है। कॉन्फ्रेंस में देश और विदेश से अनेक सम्मानित संत, विद्वान और धर्माचार्य उपस्थित रहे। इस अवसर पर साध्वी ज्ञानेश्वरी दीदी, लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र सिंह लोधी, राज्यसभा सदस्य श्रीमती सुमित्रा बाल्मिक, सांसद आशीष दुबे, महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू, विधायक अशोक रोहाणी, सुशील तिवारी इंदु, डॉ. अभिलाष पांडे, संतोष बरकड़े, नीरज सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती आशा मुकेश गोटिया, नगर निगम अध्यक्ष रिकुंज विज, भाजपा नगर अध्यक्ष श्री रत्नेश सोनकर, ग्रामीण अध्यक्ष श्री राजकुमार पटेल सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। शहबाज / मोनिका / 02 जनवरी 2026/ 06.16