ज़रा हटके
03-Jan-2026
...


कराची (ईएमएस)। पाकिस्तान में ऐतिहासिक शहर तक्षशिला के पास चल रही खुदाई में पुरातत्वविदों को बड़ी कामयाबी मिली है। यूनेस्को हेरिटेज साइट भीर टीले पर उत्खनन के दौरान दुर्लभ सजावटी पत्थर और प्राचीन सिक्के मिले हैं, जो क्षेत्र की सबसे शुरुआती शहरी सभ्यता को दिखाते है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज प्राचीन सभ्यता को समझने में एक अहम कड़ी साबित होगी। रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने बीते पिछले एक दशक में इस स्थल पर हुई सबसे महत्वपूर्ण खोजों में से एक बताया है। पुरातात्विक महत्व की ये वस्तुएं प्राचीन भीर टीले पर मिली हैं। विशेषज्ञों ने ईसा पूर्व छठी शताब्दी के सजावटी पत्थर और दूसरी शताब्दी के सिक्के बरामद किए। रिपोर्ट में कहा गया कि विशेषज्ञों ने सजावटी पत्थरों के टुकड़े बरामद किए जिनकी पहचान ‘लैपिस लाजुली’ के रूप में की गई है और इसके साथ ही कुषाण वंश से संबंधित दुर्लभ कांस्य सिक्के भी मिले हैं, जिससे प्राचीन गांधार के भौतिक इतिहास को एक नया आयाम मिला है। पंजाब पुरातत्व विभाग के उप निदेशक आसिम डोगर ने कलाकृतियों के प्रारंभिक विश्लेषण की पुष्टि की। डोगर ने कहा, ‘सजावटी पत्थर लैपिस लाजुली हैं जो एक बहुमूल्य पत्थर है, जबकि सिक्के कुषाण काल ​​के हैं। खुदाई करने वाली टीम ने धातु की कलाकृतियों की आयु निर्धारित करने के लिए विशेष फॉरेंसिक सहायता ली। डोगर ने बताया कि पेशावर विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों की ओर से किए गए विस्तृत मुद्रा विश्लेषण से पुष्टि हुई है कि सिक्कों पर सम्राट वासुदेव की छवि अंकित है। इतिहासकार वासुदेव को इस क्षेत्र पर शासन करने वाले अंतिम ‘कुषाण शासक’ मानते हैं। क्या था तक्षशिला? डोगर ने कहा कि आसपास के पुरातात्विक साक्ष्यों से साफ होता है कि ये अवशेष आवासीय क्षेत्र थे। ये नवीनतम खोजें इसकी पुष्टि करती हैं कि कुषाण शासन के दौरान तक्षशिला अपने राजनीतिक, सांस्कृतिक और आर्थिक प्रभाव के चरम पर था। डोगर ने कहा, ‘कनिष्क जैसे सम्राटों के शासनकाल में तक्षशिला एक प्रमुख प्रशासनिक, वाणिज्यिक और बौद्धिक केंद्र के रूप में उभरा। उन्होंने कहा कि इस युग में बौद्ध धर्म को कुषाण काल ​​का व्यापक संरक्षण मिलने के कारण स्तूपों, मठों और विशाल धार्मिक परिसरों का निर्माण हुआ। आशीष/ईएमएस 03 जनवरी 2026