राष्ट्रीय
04-Jan-2026
...


सामाजिक कार्यकर्ता ने डिप्टी सीएम विजय सिन्हा को पत्र लिखकर जांच की मांग की पटना (ईएमएस)। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के नए कौटिल्य नगर आवास को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता विकास चंद्र उर्फ गुड्डू बाबा ने आरोप लगाया है कि सांसद-विधायकों को आवंटित जमीन में नियम और शर्तों का उल्लंघन हुआ है। उन्होंने डिप्टी सीएम विजय सिन्हा को पत्र लिखकर उच्च स्तरीय जांच की मांग कर दी है। आरोपों के अनुसार, लालू और उनके परिवार ने एक से अधिक प्लॉट लेकर आलीशान घर बनाया, जबकि नियम ये थे कि किसी को एक से अधिक प्लॉट नहीं मिलेगा और जमीन बेचने पर सोसाइटी को सरेंडर करनी होगी। बात दें कि कौटिल्यनगर की जमीन मूल रूप से वेटनरी कॉलेज की थी, इस 1916 में पटना विश्वविद्यालय के लिए अधिग्रहित किया गया। 1987 में बिहार सांसद एवं विधायक सहकारी समिति को 15 एकड़ जमीन दी गई, ताकि सांसद-विधायकों को आवास के लिए प्लॉट आवंटित हो सकें। 1992 में लालू यादव को प्लॉट संख्या 208 आवंटित हुआ था, लेकिन आरोप है कि उन्होंने अतिरिक्त प्लॉट 207, 151, 209, 211 और 210 हासिल किए। इसमें से कुछ प्लांट सस्ते दामों पर खरीदे गए थे। लीज की शर्तों के अनुसार जमीन केवल आवासीय उपयोग के लिए थी। हालांकि, लालू यादव के रेल मंत्री रहते हुए प्लॉट 208 पर एसएसबी का जोनल ऑफिस चला और 2017 में समाप्त हुई लीज को 2025 में रिन्यू किया गया। दिवंगत सुशील कुमार मोदी की किताब ‘लालू लीला’ में भी जमीन के अतिरिक्त प्लॉट लेने का दावा किया गया है। वहीं राजनीतिक प्रतिक्रियाओं में जदयू के एमएलसी नीरज कुमार ने जांच की मांग कर पूछा कि जमीन दान में मिली या सर्किल रेट पर खरीदी गई। वहीं डिप्टी सीएम सिन्हा ने कहा कि शिकायत मिलने पर तुरंत जांच होगी और अगर धोखाधड़ी या राजस्व हानि पाई गई तो कार्रवाई की जाएगी। वर्तमान में लालू परिवार 14 जनवरी 2026 तक खरमास समाप्त होने के बाद कौटिल्यनगर शिफ्ट होने की तैयारी में है। घर का निर्माण तेजी से चल रहा है, जिसमें 24 से अधिक मजदूर काम कर रहे हैं। लेकिन गुड्डू बाबा ने मांग की है कि जांच पूरी होने तक निर्माण न हो। कुल मिलाकर यह विवाद लालू परिवार के 10 सर्कुलर रोड और अन्य सरकारी आवास खाली करने के नोटिस के बाद बिहार की राजनीति में नया तनाव पैदा कर रहा है। यह मामला नियम, जमीन और रसूख को लेकर राजनीतिक हलकों में बहस का केंद्र बन चुका है। आशीष दुबे / 04 जनवरी 2026