राष्ट्रीय
05-Jan-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। भारतीय विदेश मंत्री एस.जयशंकर 6 दिन के दौरे पर उस देश में गए हुए हैं, जहां से भारत के सबसे आधुनिक फाइटर जेट की डील की है। यहां से वे यूरोप भी जाएंगे और उनकी यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करना है। वैसे भारत-फ्रांस की रणनीतिक पार्टनरशिप अच्छी है, लेकिन ये दौरा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि माना जा रहा है कि फ्रांस, भारत को राफेल फाइटर जेट इंजन की टेक्नोलॉजी और इंटेलेक्चुअलर प्रॉपर्टी भी ट्रांसफर कर सकता है। दरअसल जयशंकर 4 से 10 जनवरी तक फ्रांस और लैक्जमबर्ग की यात्रा पर जा रहे हैं, जिसका मकसद दोनों देशों के साथ भारत के द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना है। फ्रांस में जयशंकर अपने समकक्ष विदेश मंत्री जीन नोएल बैरोट से मिलकर भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक साझेदारी की प्रगति पर चर्चा करने वाले है। साथ ही दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी बात होगी। हालांकि इस यात्रा में राफेल फाइटर इंजन जेट की डील का मुद्दा अहम है। दरअसल एक महीने पहले खबर आई थी कि फ्रांसीसी कंपनी सैफरन, भारत को राफेल लड़ाकू विमान के इंजन की तकनीक सौंपने के लिए तैयार है। अब जयशंकर के फ्रांस दौरे को इससे जोड़कर देखा जा रहा है। राफेल में सैफरन के एम88 इंजन का इस्तेमाल होता है, वहां पहले इसका लोकल वर्जन और घरेलू एयरक्राफ्ट के लिए एक डेरिवेटिव इंजन का ऑफर किया था। हालांकि एक रिपोर्ट में बताया गया कि अब कंपनी 100 प्रतिशत टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करने और भारत में नया पावरप्लांट शुरू करने को तैयार है। माना जा रहा है कि चर्चा एएमसीए पांचवीं जेनरेशन के फाइटर इंजन पर भी हो रही है, जो रूस से लिए गए एसयू-57 से भी बेहतर परफॉर्म करता है। सैफरन के इंजन पावरप्लांट की कीमत बहुत ज्यादा है, लेकिन भारत इसके लिए पैसे खर्च करने को तैयार है। वजह ये है कि 12 साल की लाइफ वाले प्लांट में अलग-अलग तरह के एयरक्राफ्ट के लिए कम से कम 9 प्रोटोटाइप इंजन बन सकते है। फ्रांस के साथ भारत की ये डील अगर हो जाती है कि भारत ग्लोबल कॉम्पिटिटर बनने की राह पर आ जाएगा। इसके बाद विदेश मंत्री पेरिस में 31वें फ्रेंच एंबेसडर्स कॉन्फ्रेंस में गेस्ट ऑफ ऑनर के तौर पर संबोधित करने वाले है। यहां वे वैश्विक कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर भारत के विचार रखने वाले हैं। भारत और फ्रांस के बीच रणीनीतक रिश्ते 1998 से शुरू हुए, जो लगातार बढ़ रहे हैं। धीरे-धीरे दोनों देश समुद्री सुरक्षा, डिजिटल मोर्चे, साइबर सुरक्षा, एडवांस्ड कंप्यूटिंग, आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन, रिन्यूएबल एनर्जी के मुद्दे पर भी साथ आए हैं। फ्रांस में अपने कार्यक्रमों के बाद जयशंकर लक्जमबर्ग जाने वाले हैं, जहां वे उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री जेवियर बेटेल से मुलाकात करने वाले है। वे यहां पर भारतीय समुदाय के लोगों से भी मिल सकते है। भारत और लक्जमबर्ग के बीच आजादी के बाद 1948 से ही राजनयिक रिश्ते हैं। एशिया में लक्जमबर्ग के 5 दूतावासों में से एक नई दिल्ली में है। आशीष दुबे / 05 जनवरी 2026