अंतर्राष्ट्रीय
05-Jan-2026
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वॉशिंगटन(ईएमएस)। इतिहास अक्सर खुद को दोहराता है, और वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी ने इस कहावत को एक बार फिर चरितार्थ कर दिया है। आज वेनेजुएला में जो कुछ भी हो रहा है, वह पनामा की उसी कहानी का आधुनिक संस्करण प्रतीत होता है। मादुरो पर भी वही आरोप हैं और अमेरिकी कार्रवाई का तरीका भी लगभग वैसा ही है। यह घटनाक्रम एक बार फिर यह साबित करता है कि वैश्विक राजनीति में न तो कोई स्थायी मित्र होता है और न ही कोई स्थायी शत्रु, और जब किसी शासक की उपयोगिता समाप्त हो जाती है या वह महाशक्तियों के हितों के आड़े आने लगता है, तो इतिहास की ये हिंसक कड़ियाँ फिर से जुड़ने लगती हैं। अमेरिकी प्रशासन द्वारा जिस तरह से मादुरो को सत्ता से बेदखल कर हिरासत में लिया गया है, उसने लगभग 36 साल पहले पनामा में हुए सैन्य अभियान की यादें ताजा कर दी हैं। उस समय भी अमेरिका ने एक लैटिन अमेरिकी देश के शासक को उन्हीं आरोपों के आधार पर पकड़ा था, जो आज मादुरो पर लगाए गए हैं। यह घटनाक्रम अंतरराष्ट्रीय राजनीति में सैन्य हस्तक्षेप के उन अध्यायों की याद दिलाता है, जिसमें पनामा के मैनुएल नोरीएगा और बाद में इराक के सद्दाम हुसैन जैसे शासकों का अंत हुआ। 3 जनवरी 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला में एक बड़े सैन्य ऑपरेशन के जरिए निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में ले लिया है। अमेरिका लंबे समय से मादुरो पर भ्रष्टाचार, नार्को-आतंकवाद और ड्रग तस्करी के गंभीर आरोप लगाता रहा है। वर्ष 2020 में ही अमेरिकी अदालतों ने उन पर मुकदमा दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी के लिए करोड़ों डॉलर के इनाम की घोषणा की थी। यह पूरी प्रक्रिया ठीक वैसी ही नजर आती है जैसी 1989 में पनामा के तत्कालीन शासक मैनुएल नोरीएगा के खिलाफ अपनाई गई थी। मैनुएल नोरीएगा का उदय पनामा की सैन्य खुफिया शाखा से हुआ था। वह एक बेहद चतुर और निर्दयी रणनीतिकार माना जाता था, जिसने अपने विरोधियों को कुचलने के लिए हर संभव हथकंडा अपनाया। दिलचस्प बात यह है कि नोरीएगा एक समय में अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए का करीबी सहयोगी था। शीत युद्ध के दौरान उसने मध्य अमेरिका में साम्यवाद के विस्तार को रोकने में अमेरिका की काफी मदद की थी। पनामा में अमेरिकी खुफिया ठिकाने बनाने और अमेरिका समर्थित गुटों तक सहायता पहुँचाने में उसकी भूमिका अहम थी। हालांकि, सत्ता की भूख ने नोरीएगा को अपराध की दुनिया की ओर धकेल दिया। उसने कोलंबिया के कुख्यात ड्रग माफिया पाब्लो एस्कोबार के साथ गठबंधन कर लिया। पनामा के बैंकों का उपयोग नशीले पदार्थों के पैसों को सफेद करने के लिए किया जाने लगा और बड़े पैमाने पर कोकीन अमेरिका पहुँचने लगी। शुरुआत में अमेरिका ने साम्यवाद विरोधी अभियानों में उसकी उपयोगिता को देखते हुए इन गतिविधियों को नजरअंदाज किया, लेकिन जल्द ही दोनों के बीच दरार बढ़ने लगी। जब अमेरिका को यह संदेह हुआ कि नोरीएगा अन्य देशों की खुफिया एजेंसियों को भी जानकारी दे रहा है, तो रिश्तों में खटास आ गई। 1988 में अमेरिका ने उन पर ड्रग तस्करी के आरोप तय किए। टकराव तब चरम पर पहुँच गया जब 1989 में नोरीएगा ने लोकतांत्रिक चुनावों को रद्द कर खुद को सर्वोच्च नेता घोषित किया और अमेरिका के खिलाफ युद्ध जैसी स्थिति पैदा कर दी। पनामा सिटी में एक अमेरिकी मरीन की हत्या ने आग में घी का काम किया, जिसके बाद अमेरिका ने ऑपरेशन जस्ट कॉज शुरू कर नोरीएगा को दबोच लिया। वीरेंद्र/ईएमएस 05 जनवरी 2026