नई दिल्ली(ईएमएस)। भारत ने ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विशाख रिफाइनरी में रेसिड्यू अपग्रेडेशन फैसिलिटी (आरयूएफ) के सफल संचालन की सराहना करते हुए इसे देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने वाला एक क्रांतिकारी कदम बताया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह अत्याधुनिक प्लांट न केवल हमारी ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करेगा, बल्कि इस क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयासों को भी नई गति प्रदान करेगा। विशाख रिफाइनरी में शुरू की गई यह सुविधा स्वदेशी इंजीनियरिंग और तकनीकी विशेषज्ञता का एक बेजोड़ उदाहरण है। इस प्लांट की सबसे बड़ी खासियत इसके तीन एलसी-मैक्स रिएक्टर हैं, जिनका कुल वजन लगभग 2,200 मीट्रिक टन है। ये रिएक्टर दुनिया के सबसे भारी इंजीनियरिंग ब्लॉकों में गिने जाते हैं। सबसे गर्व की बात यह है कि इन विशालकाय ब्लॉकों का निर्माण और असेंबलिंग पूरी तरह से भारत में ही की गई है, जो मेक इन इंडिया की सफलता को दर्शाता है। तकनीकी दृष्टि से यह प्लांट बेहद उन्नत है। 3.55 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (एमएमटीपीए) की क्षमता वाली यह सुविधा एडवांस्ड रेसिड्यू हाइड्रोक्रैकिंग टेक्नोलॉजी पर आधारित है। इस तकनीक के माध्यम से कच्चे तेल के सबसे निचले और भारी हिस्से (रेसिड्यू) का लगभग 93 प्रतिशत हिस्सा उच्च-मूल्य वाले उत्पादों और उपयोगी ईंधन में बदला जा सकता है। इससे पहले, तेल का यह हिस्सा कम कीमत वाले अवशेष के रूप में बच जाता था, लेकिन अब इस नई तकनीक से हर बैरल कच्चे तेल का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित हो सकेगा। इस परियोजना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के दूरदर्शी नेतृत्व में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक निर्णायक मील का पत्थर माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के इंफ्रास्ट्रक्चर से न केवल देश की बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी, बल्कि कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता भी कम होगी। यह रिफाइनरी अब कच्चे तेल को साफ करने के पारंपरिक तरीकों को पीछे छोड़ते हुए आधुनिक और कुशल उत्पादन की नई मिसाल पेश कर रही है। वीरेंद्र/ईएमएस/06जनवरी2026