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06-Jan-2026
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-17 मौतों से पहले ही मेयर ने बांट दी थी क्लीन चिट -वायरल वीडियो ने खोला भागीरथपुरा का सबसे बड़ा झूठ इंदौर(ईएमएस)। मध्य प्रदेश के इंदौर के भागीरथपुरा की गलियां अभी 17 मौतों के मातम से उबर भी नहीं पाई थीं कि सिस्टम की बेशर्मी का एक और सबूत सामने आ गया। महीनों पुराना एक वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल है, जिसने मेयर पुष्यमित्र भार्गव के मंच से किए गए विकास के तमाम दावों की पोल खोल दी है। यह वही वीडियो है, जिसमें मौतों से पहले ही भागीरथपुरा के पार्षद कमल वाघेला को मेयर खुले मंच से अच्छे कामों का सर्टिफिकेट बांटते नजर आ रहे हैं। वायरल वीडियो भागीरथपुरा में करीब दो करोड़ रुपये के कामों के भूमिपूजन का बताया जा रहा है। मंच से मेयर पुष्यमित्र भार्गव पार्षद कमल वाघेला की तारीफों के पुल बांधते दिखते हैं। मेयर दावा करते हैं कि वार्ड में 24 सडक़ें बनाई गईं, हर सडक़ से पहले ड्रेनेज डाली गई, फिर पीने के पानी की पाइपलाइन बिछाई गई। मेयर के मुताबिक सिर्फ सडक़ों पर ही 2 करोड़ 40 लाख खर्च हुए और उतना ही पैसा पानी की पाइपलाइन और ड्रेनेज पर भी लगा। मंच से एलान किया गया कि पार्षद ने तीन साल में करीब 10 करोड़ रुपये का विकास कर दिया और मेयर होने के नाते वे उन्हें अच्छा काम करने का सर्टिफिकेट दे रहे हैं। लेकिन आज यही दावे 17 लाशों के सामने झूठे साबित हो चुके हैं। जिन सडक़ों के नीचे ड्रेनेज और पाइपलाइन पूरी होने का दावा किया गया, वहीं आज सीवेज उफन रहा है, पाइपलाइन जगह-जगह से लीक है और उसी जहरीले पानी को पीकर लोग मर गए। अगर ड्रेनेज और पाइपलाइन वाकई डल चुकी थी, तो फिर लोगों ने जहर कैसे पिया? अगर करोड़ों खर्च हो चुके थे, तो नलों से साफ पानी की जगह गंदा पानी क्यों आ रहा था? चार मौत के बाद पास हुआ टेंडर सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि 31 दिसंबर को यह सामने आया कि जिस 2 करोड़ 40 लाख के टेंडर की बात की जा रही थी, वह टेंडर असल में 30 दिसंबर 2025 को पास हुआ। उस वक्त तक चार लोगों की मौत हो चुकी थी। यानी जिन कामों के पूरे होने का दावा मेयर महीनों पहले मंच से कर रहे थे, वे काम तो कागजों में भी मौतों के बाद पास हुए। यह वीडियो अब साफ बता रहा है कि विकास के दावे मंच तक सीमित थे और हकीकत नालियों में बह रही थी। तारीफों का रिकॉर्ड मौजूद है, भाषण कैमरे में कैद हैं, लेकिन जवाबदेही आज भी गायब है। जिन हाथों को विकास का सर्टिफिकेट मिला, उन्हीं वार्ड की गलियों से अर्थियां उठीं। भागीरथपुरा में सवाल अब सिर्फ 17 मौतों का नहीं है, सवाल उस सिस्टम का है जो झूठे आंकड़ों, झूठे भाषणों और झूठी तारीफों पर चलता रहा। अगर सब कुछ इतना शानदार था, तो फिर 17 घरों के चिराग कैसे बुझ गए? और अगर यह सब झूठ था, तो अब शर्म किसे आनी चाहिए?