वॉशिंगटन (ईएमएस)। एयर फोर्स वन पर पत्रकारों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से इस ऑपरेशन के मकसद के बारे में सवाल किया। एक पत्रकार ने पूछा, क्या ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व तेल या सत्ता परिवर्तन के लिए था? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि यह पृथ्वी पर शांति के लिए किया गया। ट्रंप ने मोनरो डॉक्ट्रिन का जिक्र किया, जो 1823 की अमेरिकी नीति है। इसके तहत, पश्चिमी इलाकों को अमेरिकी प्रभाव क्षेत्र माना जाता है। ट्रंप ने इसे डॉन-रो डॉक्ट्रिन कहकर अपडेट बताया और जोर दिया कि यह उनका गोलार्ध है, जहां शांति जरूरी है। इस सैन्य कार्रवाई को सफल बनाने के लिए महीनों तक गुप्त तैयारी की गई थी। खुफिया एजेंसियों ने राष्ट्रपति मादुरो की हर गतिविधि पर नजर रखी, जिसके बाद विशेष बलों और डेल्टा फोर्स ने इस जटिल ऑपरेशन को अंजाम दिया। सैन्य जानकारी के अनुसार, लगभग 150 अमेरिकी विमानों ने वेनेजुएला के हवाई सुरक्षा तंत्र को निष्क्रिय कर दिया, जिससे हेलीकॉप्टरों के माध्यम से सैनिकों को उतारना आसान हो गया। राष्ट्रपति ट्रंप ने इस मिशन की सराहना करते हुए इसे अमेरिकी सैन्य शक्ति का एक उत्कृष्ट उदाहरण बताया और राहत जताई कि इस पूरी कार्रवाई में किसी भी अमेरिकी सैनिक की जान नहीं गई। हिरासत में लिए गए निकोलस मादुरो को न्यूयॉर्क ले जाया गया है, जहां उन पर नार्को-टेररिज्म और नशीले पदार्थों की तस्करी जैसे गंभीर आरोपों के तहत कानूनी कार्यवाही की जाएगी। हालांकि, इस ऑपरेशन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी बहस छेड़ दी है। जहां अमेरिकी प्रशासन इसे वेनेजुएला में सुरक्षा और व्यवस्था बहाल करने का कदम बता रहा है, वहीं कई देशों और आलोचकों ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन करार दिया है। आलोचकों का तर्क है कि यह दूसरे देश की संप्रभुता में सीधा हस्तक्षेप है। इसके बावजूद, ट्रंप ने वेनेजुएला की वर्तमान स्थिति को एक मृत देश के समान बताया और घोषणा की कि जब तक वहां स्थितियां पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जातीं, तब तक अमेरिका वहां का नियंत्रण संभाले रखेगा। उन्होंने अपनी घरेलू राजनीति का जिक्र करते हुए यह भी कहा कि यदि अमेरिका में नेतृत्व की स्थिति अलग होती, तो वहां के हालात भी वेनेजुएला जैसे अस्थिर हो सकते थे। वर्तमान में, पूरी दुनिया की नजरें इस अभियान के बाद होने वाले वैश्विक कूटनीतिक परिणामों पर टिकी हैं। वीरेंद्र/ईएमएस/05जनवरी2026