राज्य
05-Jan-2026
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वाराणसी (ईएमएस)। नेशनल वॉटरवेज -1 पर गंगा नदी का जलस्तर कई स्थानों पर कम होने के कारण अत्याधुनिक गंगा विलास क्रूज पटना (बिहार) से शुक्रवार को वापस कोलकाता पश्चिम बंगाल लौट गया। क्रूज को वाराणसी आना था, लेकिन जलस्तर कम होने से आगे का संचालन संभव नहीं हो सका। क्रूज में सवार 30 विदेशी पर्यटकों को सड़क मार्ग से वाराणसी लाया गया। गंगा विलास क्रूज 12 नवंबर को कोलकाता से वाराणसी के लिए रवाना हुआ था। इसमें जर्मनी, स्विट्जरलैंड और अमेरिका के 30 पर्यटक सवार थे। यात्रा के दौरान कुल 15 ठहराव स्थल निर्धारित थे। क्रूज पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद, मायापुर, मटियारी और फरक्का के अलावा झारखंड के साहिबगंज तथा बिहार के सेमरिया और मुंगेर होते हुए पिछले महीने पटना पहुंचना था। इन ठहराव स्थलों पर पर्यटकों ने धार्मिक, पौराणिक व ऐतिहासिक महत्व के स्थलों के साथ-साथ स्थानीय विशेष स्थानों का भ्रमण किया। पटना से वाराणसी के लिए आगे बढ़ने पर गंगा का जलस्तर कम होने के कारण क्रूज को रोक दिया गया। इसके बाद सभी पर्यटकों को सड़क मार्ग से वाराणसी लाया गया, जहां वे काशीविश्वनाथ मंदिर में दर्शन करेंगे तथा सारनाथ समेत अन्य प्रमुख स्थलों का भ्रमण करेंगे। पर्यटक दशासमेध घाट की गंगा आरती भी देखेंगे। इनमें से 25 पर्यटक वापस लौट जाएंगे, जबकि पांच पर्यटक वाराणसी में रुकेंगे। गंगा विलास का संचालन करने वाली हेरिटेज रिवर्स जर्नी (अंतरा) के निर्देशक राज सिंह ने बताया की जलयान को दो दिन पहले पटना से वापस कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि पटना से वाराणसी के बीच कुल सात स्थानों पर जलस्तर क्रूज संचालन के अनुकूल नहीं था। गंगा नदी में सबसे लंबी दूरी तय करने वाला गंगा विलास जलयान का शुभारंभ 13 जनवरी, 2023 को रविदास घाट पर आयोजित समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्चुअल उद्घाटन किया था। गंगा विलास जलयान वर्ष 2024 में भी वाराणसी होकर गुजरा था। काशी से गुजरना इसकी तीसरी यात्रा रही, जो संभव नहीं हो सकी। गंगा विलास जलयान के प्रथम बार के संचालन के समय ही गंगा नदी विशेषज्ञों ने इस बात पर आशंका जताई थी कि पटना से बलिया, गाजीपुर,वाराणसी,मिर्जापुर तथा इलाहाबाद तक गंगा नदी उतनी गहरी नहीं है, जिसमें इतने बड़े जलयान को चलाया जा सके, फिर भी प्रशासन ने इसको चलाना उचित समझा, लेकिन वर्ष -2025 में गंगा के जलस्तर में गहराई कम होने के कारण अंतत पटना से इस जलयान को वापस कोलकाता भेजना पड़ा। डॉ नरसिंह राम/05/01/2026