कहा-योजना में गरीबों और मजदूरों का ध्यान नहीं रखा, भोपाल (ईएमएस) । मनरेगा के नाम बदलने को लेकर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह जिले सीहोर से दिग्विजय सिंह जनसंपर्क पर निकले हैं। इच्छावर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम खेरी पहुंचे दिग्विजय सिंह ने मनरेगा श्रमिकों से संवाद किया और केंद्र सरकार के नए कानून को लेकर कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान पर निशाना साधा। ग्राम खेरी में दिग्विजय सिंह ने मनरेगा मजदूरों से काफी देर तक बातचीत की। संवाद के दौरान उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा मजदूर और किसानों की लड़ाई लड़ती रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश के कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जो नया कानून बनाया है, उसमें गरीबों और मजदूरों का ध्यान नहीं रखा गया है। पदयात्रा की शुरुआत करते ही दिग्विजय सिंह ने केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाना देश के राष्ट्रपिता का अपमान है। उन्होंने इसे केवल नाम परिवर्तन नहीं बल्कि विचारधारा पर हमला बताया। उन्होंने संकल्प लिया कि जब तक गांधी का नाम मनरेगा से दोबारा नहीं जोड़ा जाता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। वे गांव-गांव जाकर मजदूरों से मिल रहे हैं, जॉब कार्ड दिखवाकर उन्हें उनके अधिकारों का पाठ पढ़ा रहे हैं। इसके साथ ही सीहोर जिले के इछावर विधानसभा के खेरी गांव में ग्राम पंचायत कांग्रेस कमेटी का गठन किया गया। पूर्व मुख्यमंत्री व राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह की मौजूदगी में ग्राम चौपाल के माध्यम से ग्राम सभा में बैठकर पंचायत स्तर की कमेटी बनाई गई। इसी के साथ मध्यप्रदेश कांग्रेस संगठन को जमीनी स्तर पर पुनर्गठित करने की कवायद तेज हो गई है। दरअसल विधानसभा चुनाव के करीब 2 साल पहले कांग्रेस का कैंपेन शुरू हुआ है। ग्राम कमेटी गठन करने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का गांव-गांव जनसंपर्क अभियान शुरू हुआ है। मध्यप्रदेश कांग्रेस के नेताओं ने घर-घर पहुंचने का कार्यक्रम शुरू किया है। मतदाताओं, जनता से मिलकर सरकार की खामियां बता रहे है। 2028 में कांग्रेस की सरकार बनाने की अपील कर रहे है। कांग्रेस मजदूरों के साथ खड़ी रहेगी दिग्विजय सिंह ने कहा कि कांग्रेस की यह मुहिम आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि नए कानून के तहत ज्यादा से ज्यादा काम मिल सके, इसके लिए लगातार प्रयास किए जाएंगे और मजदूरों की आवाज को मजबूती से उठाया जाएगा। खेरी गांव में रात्रि विश्राम के बाद सोमवार सुबह दिग्विजय सिंह पैदल गांव की गलियों में निकले। उन्होंने घर-घर जाकर ग्रामीणों से बातचीत की। ग्रामीणों ने पानी, सडक़, जलभराव, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और रोजगार से जुड़ी समस्याएं उनके सामने रखीं। यह दौरा कांग्रेस के जमीनी स्तर पर संपर्क और संगठन को मजबूत करने की पहल के तौर पर देखा जा रहा है। गरीब, मजदूर और गांव बने राजनीति का केंद्र इस पदयात्रा का सबसे बड़ा संदेश यह है कि दिग्विजय सिंह ने फिर से राजनीति का केंद्र गरीब और ग्रामीण भारत को बना दिया है। वे खेतों, चौपालों और पगडंडियों पर निकलकर उन परिवारों से संवाद कर रहे हैं, जिनकी आवाज सत्ता के गलियारों तक नहीं पहुंचती। यह वही वर्ग है जो चुनावी परिणाम तय करता है। दिग्विजय सिंह का फोकस साफ है कि सत्ता का रास्ता गांव से होकर जाता है।