राष्ट्रीय
08-Jan-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। अक्सर लोग सोचते हैं कि पानी पीने से मुंह की सूखापन दूर हो जाएगा, लेकिन कई बार पर्याप्त पानी लेने के बावजूद भी लार की कमी के कारण मुंह सूखा ही रहता है। आयुर्वेद में इसे ‘मुख शोष’ कहा जाता है। लार न केवल भोजन को पचाने में मदद करती है, बल्कि दांतों की सुरक्षा, मुंह को गीला रखने और संक्रमण से बचाने का भी काम करती है। आयुर्वेद के अनुसार मुंह सूखना और लार कम बनना वात, पित्त और अग्नि के असंतुलन से जुड़ा है। सर्दियों में वात दोष प्राकृतिक रूप से बढ़ जाता है, जिससे शरीर में रूखापन बढ़ता है। वहीं, पित्त दोष शरीर में गर्मी और जलन को बढ़ाता है। इन दो दोषों और अग्नि के असंतुलन के कारण मुंह सूखने और लार कम बनने की समस्या होती है, जो पाचन और पूरे स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। इस परेशानी से राहत पाने के लिए आयुर्वेद में कुछ आसान घरेलू उपाय सुझाए गए हैं। सबसे प्रभावकारी उपाय है घृत पान। सुबह खाली पेट गुनगुने पानी में एक चम्मच घी मिलाकर पीने से शरीर की शुष्कता और मुंह की सूखापन में कमी आती है। इसके अलावा, मुलेठी का चूर्ण भी मददगार है। मुलेठी का चूर्ण शहद के साथ दिन में दो बार लेने से गले को ठंडक मिलती है, शरीर की गर्मी कम होती है और लार का निर्माण प्राकृतिक रूप से बढ़ता है। मुंह की शुष्कता को कम करने के लिए ऑयल पुलिंग भी बेहद असरदार है। दिन में दो बार तेल से कुल्ला करने से मुंह की लार ग्रंथियां सक्रिय होती हैं और दांतों की सेहत भी बेहतर रहती है। इसके अलावा, आंवला का रस और धनिए का पानी भी इस समस्या में लाभदायक हैं। आंवला का रस पित्त को शांत करता है और लार बनाने में मदद करता है, जबकि धनिए का पानी पेट की जलन और शरीर की शुष्कता को कम करता है। आयुर्वेद में यह माना गया है कि नियमित रूप से ये उपाय अपनाने से न केवल मुंह की सूखापन कम होती है, बल्कि पाचन शक्ति भी मजबूत रहती है और शरीर का संतुलन बना रहता है। सुदामा/ईएमएस 08 जनवरी 2026