लेख
09-Jan-2026
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(10 जनवरी विश्व हिन्दी दिवस) आज 10 जनवरी है, वह ऐतिहासिक दिन जब दुनिया भर के हिंदी प्रेमी अपनी भाषाई पहचान और सांस्कृतिक गौरव का उत्सव मनाते हैं। विश्व हिंदी दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन भर नहीं है, बल्कि यह उस वैश्विक यात्रा का प्रतिबिंब है जिसे हिंदी ने सदियों के संघर्ष और गौरवशाली साहित्य के साथ तय किया है। 10 जनवरी 1975 को नागपुर में आयोजित पहले विश्व हिंदी सम्मेलन की स्मृति में शुरू हुआ यह सिलसिला आज वर्ष 2026 में एक ऐसे स्वर्णिम मुकाम पर पहुँच चुका है, जहाँ हिंदी ने क्षेत्रीयता की सीमाओं को लांघकर ग्लोबल पहचान हासिल कर ली है। आज यह दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी बोली जाने वाली भाषा के रूप में न केवल करोड़ों लोगों के संवाद का जरिया है, बल्कि कूटनीति, व्यापार और तकनीक के क्षेत्र में भी अपनी धाक जमा रही है। हिंदी की सबसे बड़ी शक्ति इसकी वैज्ञानिकता, सरलता और समावेशी प्रकृति है। देवनागरी लिपि की यह विशेषता है कि जैसा बोला जाता है, वैसा ही लिखा भी जाता है, जो इसे दुनिया की सबसे सुस्पष्ट भाषाओं में से एक बनाता है। आज फिजी, मॉरीशस, गयाना, सूरीनाम, नेपाल और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों में हिंदी की गूँज न केवल प्रवासी भारतीयों के घरों में, बल्कि वहाँ के शिक्षण संस्थानों और व्यावसायिक केंद्रों में भी सुनी जा सकती है। भारत की सॉफ्ट पावर के रूप में हिंदी ने योग, आयुर्वेद और भारतीय दर्शन को वैश्विक स्तर पर पहुँचाने में सेतु का कार्य किया है। आज दुनिया के 100 से अधिक विश्वविद्यालयों में हिंदी के विशेष पाठ्यक्रम पढ़ाए जा रहे हैं, जो इस बात का प्रमाण है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस भाषा की गहराई और मिठास को आत्मसात करने के लिए उत्सुक है। डिजिटल क्रांति और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस आधुनिक दौर ने हिंदी को नई ऊर्जा प्रदान की है। एक समय माना जाता था कि तकनीक केवल अंग्रेजी की जागीर है, लेकिन 2026 के इस वर्तमान परिदृश्य ने उन सभी धारणाओं को गलत साबित कर दिया है। आज गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और फेसबुक जैसे वैश्विक दिग्गज हिंदी सामग्री की मांग को देखते हुए इसे अपनी सेवाओं के केंद्र में रख रहे हैं। सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर हिंदी का बढ़ता प्रयोग यह दर्शाता है कि यह अब केवल संवेदनाओं की नहीं, बल्कि सशक्त बाजार की भाषा भी बन चुकी है। इंटरनेट पर सबसे तेजी से बढ़ने वाली सामग्री अब हिंदी में है, जिसने दूर-दराज के गांवों को भी वैश्विक डिजिटल मुख्यधारा से जोड़ दिया है। वर्तमान समय में हिंदी का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि यह अब रोजगार की मुख्य भाषा के रूप में उभरी है। अनुवाद, सामग्री लेखन और अंतरराष्ट्रीय विपणन के क्षेत्र में हिंदी जानने वालों की मांग वैश्विक स्तर पर बढ़ी है। विश्व की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं अब भारतीय उपभोक्ताओं तक पहुँचने के लिए हिंदी को अपनी संचार नीति का हिस्सा बना रही हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी अब हिंदी की गूँज अधिक स्पष्टता और अधिकार के साथ सुनाई देती है, जो भारत के बढ़ते वैश्विक कद का परिचायक है। यह भाषा केवल संवाद का साधन नहीं, बल्कि हमारे आत्मसम्मान और राष्ट्रीय गौरव की संवाहिका है। जब हम अपनी भाषा को सम्मान देते हैं, तो पूरी दुनिया हमारे मूल्यों का सम्मान करती है। साहित्यिक दृष्टिकोण से देखें तो हिंदी का भंडार अत्यंत समृद्ध है। कबीर के दोहों से लेकर प्रेमचंद के यथार्थवाद तक और महादेवी वर्मा की वेदना से लेकर धर्मवीर भारती की लोकप्रियता, आज के आधुनिक ब्लॉगर्स तक, इस भाषा ने मानवीय भावनाओं को अत्यंत सूक्ष्मता से उकेरा है। आज की युवा पीढ़ी भी हिंदी कविता और कहानियों को नए डिजिटल स्वरूप में पेश कर रही है, जो भाषा के निरंतर प्रवाहमान होने का प्रमाण है। हिंदी दिवस पर हमें यह संकल्प लेने की आवश्यकता है कि हम अपनी भाषा को बोलने में गर्व महसूस करें। हमारा भाषाई स्वाभिमान ही हमारी आने वाली पीढ़ियों को उनकी संस्कृति और संस्कारों से जोड़े रखने का एकमात्र मार्ग है। हिंदी का प्रत्येक शब्द हमारी मिट्टी की खुशबू को पूरी दुनिया में फैलाने की क्षमता रखता है। विश्व मंच पर हिंदी की बढ़ती धमक इस बात का संकेत है कि आने वाला समय हिंदी का है। यह एक ऐसी भाषा है जो वसुधैव कुटुंबकम की भावना को चरितार्थ करती है और मानवता को एकता के सूत्र में पिरोती है। 2026 का यह विश्व हिंदी दिवस हमें याद दिलाता है कि हमारी जड़ें हमारी भाषा में निहित हैं। यह वह शक्ति है जो भूगोल की दूरियों को पाटकर दिलों को आपस में जोड़ती है। आइए, हम सब मिलकर हिंदी को और अधिक समृद्ध, वैज्ञानिक और वैश्विक बनाने का संकल्प लें ताकि इसकी गूँज अनंत काल तक पूरे विश्व में सुनाई देती रहे। अंततः, गर्व से कहें— हिंदी हैं हम, वतन है हिन्दोस्तां हमारा। (लेखक पत्रकार हैं) ईएमएस / 09 जनवरी 26