राष्ट्रीय
09-Jan-2026


-ये दीवारें छात्रों के लिए पोस्टर लगाने, प्रोटेस्ट और अपनी बात कहने की आजादी का सिंबल थीं नई दिल्ली,(ईएमएस)। दिल्ली यूनिवर्सिटी के नॉर्थ कैंपस में सालों से चल रही परंपरा पर ब्रेक लग गया है। यूनिवर्सिटी ने उन स्पेशल दीवारों को डिनोटिफाई कर दिया है, जिन्हें वॉल ऑफ डेमोक्रेसी कहा जाता था। छात्रों का कहना है कि ये दीवारें स्टूडेंट्स के लिए पोस्टर लगाने, प्रोटेस्ट करने और अपनी बात कहने की आजादी का सिंबल थीं। बिना कोई वजह बताए अब ये दीवारें खत्म कर दी गई हैं। छात्र इसे अपनी आवाज दबाने की कोशिश बता रहे हैं। डीयू के नॉर्थ और साउथ कैंपस में कई दीवारें ऐसी थीं जहां यूनिवर्सिटी ने खुद बोर्ड लगाकर लिखा था वॉल ऑफ डेमोक्रेसी ये आसानी से पहचानी जाती थीं। छात्र इलेक्शन के समय तो ये दीवारें पोस्टरों से भर जाती थीं। सितंबर में डीयूएसयू इलेक्शन के दौरान विरोधी पार्टियां जैसे एनएसयूआई, एबीवीपी या लेफ्ट ग्रुप्स यहां बराबरी से अपनी बात रखते थे। एक पोस्टर पर लिखा होता बोल कि लब आजाद हैं तेरे तो दूसरे पर फ्रेशर्स को एबीवीपी जॉइन करने का इनविटेशन था। इलेक्शन के अलावा भी छात्र यहां प्रोटेस्ट, मीटिंग्स या सोशल-पॉलिटिकल इश्यूज पर पोस्टर लगाते थे। ये खास जगहें सेंट स्टीफंस कॉलेज के पास, फैकल्टी ऑफ आर्ट्स के पास और दौलत राम कॉलेज के सामने वाली दीवारें थीं। सिर्फ पांच महीने पहले डीयू ने गाइडलाइंस जारी की थीं कि दीवारों को डिफेस न करें और इलेक्शन सीजन में इन ‘वॉल ऑफ डेमोक्रेसी’ को जितना हो सके बड़ा करें। दो जगहों पर ये दीवारें तय थीं। एंटी-डिफेसमेंट कमिटियां भी बनाई जाती थीं ताकि पोस्टर सिर्फ यहां लगें। बता दें बुधवार शाम को एसएफआई से जुड़ी दो लड़कियां सेंट स्टीफंस कॉलेज के पास पोस्टर लगाने आईं। पोस्टर ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल’ के खिलाफ थे, लेकिन वहां पहुंचकर उन्हें पता चला कि दीवारें अब एक्सिस्ट ही नहीं करतीं। कम से कम सात सिक्योरिटी गार्ड्स ने उन्हें रोक दिया। वीडियो में साफ दिख रहा है कि गार्ड्स पोस्टर फाड़ रहे हैं और कह रहे हैं कि यूनिवर्सिटी का ऑर्डर है। छात्रों का आरोप है कि वॉल ऑफ डेमोक्रेसी के बोर्ड्स बिना कोई नोटिस दिए हटा दिए गए। एसएफआई ने इसको लेकर प्रॉक्टर ऑफिस में कंप्लेंट दी और दीवारों को तुरंत बहाल करने की मांग की। कंप्लेंट में कहा गया है कि ये दीवारें स्टूडेंट्स के लिए डेमोक्रेटिक स्पेस थीं यहां ओपिनियन रखने, पॉलिटिकल-सोशल डायलॉग करने की आजादी मिलती थी। बिना स्टूडेंट्स या ऑर्गेनाइजेशंस से कंसल्ट किए हटाना गलत है। स्टूडेंट्स इसे डेमोक्रेटिक एक्सप्रेशन को दबाने की कोशिश बता रहे हैं। उनका कहना है कि ऐसे स्पेस कम होने से डीयू का डेमोक्रेटिक कैरेक्टर खतरे में पड़ रहा है। सिराज/ईएमएस 09जनवरी26