नई दिल्ली (ईएमएस)। मुर्गी का चूजा एक अंडे के अंदर 21 दिनों तक जिंदा रहता है और बढ़ता है। शुरुआत में एक अंडा पूरी तरह से सील लगता है। लेकिन इसके बावजूद भी एक चूजा बिना किसी बाहरी भोजन, पानी यह हवा सप्लाई के 21 दिनों तक उसके अंदर जिंदा रहता है। आइए जानते हैं कि अंडे के अंदर सांस लेने से लेकर पोषण तक एक चूजे को सभी चीजें कैसे मिलती हैं। वैसे तो अंडे का खोल कठोर और ठोस लगता है लेकिन इसमें 7000 से ज्यादा माइक्रोस्कॉपी छेद होते हैं। यह छोटे छेद हवा से ऑक्सीजन को धीरे-धीरे अंडे के अंदर जाने देते हैं। अंडे के अंदर कोरियोएलेंटोइक झिल्ली नाम का एक खास टिशु होता है। यह है ब्लड वेसल्स से भरा हुआ होता है। यह झिल्ली खोल की अंदरूनी सतह पर होती है और छेदों से गुजरने वाली ऑक्सीजन को सीधे सोख लेती है। ऑक्सीजन को चूजे के खून में पहुंचाया जाता है जबकि कार्बन डाइऑक्साइड को वापस ले जाकर बाहर छोड़ दिया जाता है। अंडे के चौड़े सिरे पर हवा की एक छोटी सी थैली होती है जिसे एयर सेल कहते हैं। जैसे-जैसे चूजा बढ़ता है और ऑक्सीजन की जरूरत बढ़ती है यह एयर सेल बड़ा हो जाता है। अंडे से निकलने से ठीक पहले चूजा एयर सेल को छेदता है और अपनी पहली असली सांस लेता है। जर्दी चूजे के लिए ऊर्जा और पोषण का स्रोत है। इसमें वसा, विटामिन, खनिज और अंग निर्माण, मस्तिष्क के विकास और वृद्धि के लिए जरूरी पोषक तत्व होते हैं। जैसे-जैसे चूजा बड़ा होता जाता है जल्दी धीरे-धीरे सिकुड़ती जाती है क्योंकि यह भ्रूण के शरीर में घुल जाती है। जैसे-जैसे चूजा पोषक तत्वों को पचाता है, वेस्ट प्रोडक्ट बनते हैं। यह एक खास थैली में जमा होते हैं जिसे एलेंटोइस कहते हैं। यह यूरिक एसिड जैसे जहरीले कचरे को सुरक्षित रूप से रखता है।अंडे का सफेद भाग जर्दी और भ्रूण को घेरे रहता है। यह मांसपेशियों और उत्तकों के विकास के लिए जरूरी पानी और उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन देता है। यह शॉक अब्जॉर्बर के रूप में भी काम करता है। इससे भ्रूण के शरीर को नुकसान नहीं पहुंचता। सुदामा/ईएमएस 10 जनवरी 2026