सिंगरौली//ईएमएस - चितरंगी जनपद पंचायत अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत सेमुआर इन दिनों भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के घेरे में है। पंचायत में जल संरक्षण के उद्देश्य से बनाए गए चेक डैम पहली ही बारिश की मार नहीं झेल पाए और ताश के पत्तों की तरह ढह गए। इस मामले ने न केवल निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि पंचायत प्रशासन और रसूखदार ठेकेदारों के बीच के गठजोड़ को भी उजागर कर दिया है। *नियमों को ताक पर रखकर हुआ निर्माण कार्य* सूत्रों और स्थानीय ग्रामीणों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, पंचायत में चेक डैम का निर्माण तकनीकी मानकों और सरकारी नियमों को पूरी तरह नजरअंदाज कर किया गया। बताया जा रहा है कि सरपंच के आदिवासी होने का अनुचित लाभ उठाते हुए क्षेत्र के कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों ने वहां ठेकेदारी प्रथा लागू कर रखी है। कागजों पर काम पंचायत स्तर पर दिखाया गया, लेकिन धरातल पर सारा नियंत्रण ठेकेदारों के हाथ में था। *गुणवत्ता मानकों के साथ हुआ खिलवाड़* न लोहा, न मानक सामग्री ग्रामीणों का आरोप है कि नाले पर बनाए गए इन चेक डैमों में सीमेंट और लोहे का इस्तेमाल मानक के अनुरूप नहीं किया गया। घटिया निर्माण सामग्री के उपयोग के कारण पिछले वर्ष निर्मित बांध इस मानसून में ही टूट गए। स्थानीय निवासियों का कहना है कि भ्रष्टाचार की वजह से चेक डैम का सुदृढ़ीकरण नहीं किया गया, जिससे वे पानी का मामूली दबाव भी सहन नहीं कर सका। *रसूखदारों का दखल और भ्रष्टाचार का खेल* ग्रामीणों ने सीधे तौर पर पंचायत निवासी चंद्रिका वैश्य पर आरोप लगाया है कि वे सरपंच और सचिव पर दबाव बनाकर पंचायत के सभी निर्माण कार्यों में हस्तक्षेप करते हैं। अधिकांश कार्यों का ठेका उन्हीं के माध्यम से संचालित होता है, जिसके कारण पारदर्शिता पूरी तरह खत्म हो चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि सरपंच के अधिकारों का उपयोग बाहरी लोग अपने निजी स्वार्थ के लिए कर रहे हैं। *उच्च स्तरीय जांच की मांग* ग्रामवासियों ने इस पूरे घोटाले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उनका दावा है कि यदि सूक्ष्मता से जांच की गई तो केवल चेक डैम ही नहीं, बल्कि पंचायत के अन्य निर्माण कार्यों में भी लाखों के घोटाले की पुष्टि होगी। सिंगरौली ईएमएस - सूरज सिंह 10 जनवरी 2026