ज़रा हटके
10-Jan-2026
...


बरमूडा (ईएमएस)। बीते कई दशकों से बरमूडा ट्रायंगल इलाका चर्चा में रहा है, क्योंकि यहां से गुजरने वाले जहाज और विमान अचानक गायब होने की घटनाओं से जुड़े किस्से सामने आते रहे हैं। बरमूडा ट्रायंगल को ‘डेविल्स ट्रायंगल’ के नाम से जाना जाता है। यह नॉर्थ अटलांटिक महासागर का वह क्षेत्र है, जो अमेरिका के मियामी, बरमूडा द्वीप और प्यूर्टो रिको के सैन जुआन के बीच स्थित माना जाता है। करीब पिछले 100 वर्षों में बरमूडा ट्रायंगल में सैकड़ों जहाजों और विमानों के लापता होने की खबरें दर्ज की गई हैं, हालांकि इनकी सटीक संख्या को लेकर मतभेद भी हैं। कई घटनाएं आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हो सकीं, लेकिन कुछ मामले इतने चर्चित हुए कि उन्होंने इस इलाके को पूरी दुनिया में रहस्यमय बना दिया। साल 1918 में अमेरिकी नौसेना का विशाल जहाज यूएसए साइक्लोप्स, जिसमें 300 से ज्यादा लोग सवार थे, बिना कोई इमरजेंसी संदेश भेजे गायब हो गया। इसी तरह 1945 में फ्लाइट 19 नाम से मशहूर अमेरिकी नौसेना के पांच ट्रेनिंग विमान अचानक लापता हो गए, और उन्हें खोजने गया एक रेस्क्यू विमान भी वापस नहीं लौटा। 1948 में 32 यात्रियों को लेकर जा रहा डीसी-3 विमान भी मियामी जाते समय गायब हो गया, जिसका आज तक कोई मलबा नहीं मिला। इन घटनाओं के पीछे कई कारण बताए जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह इलाका अचानक बदलने वाले मौसम के लिए जाना जाता है। यहां तेज तूफान, भारी बारिश और समुद्र में ऊंची-ऊंची लहरें किसी भी समय उठ सकती हैं। गल्फ स्ट्रीम जैसी शक्तिशाली समुद्री धाराएं हालात को और खतरनाक बना देती हैं। कुछ लोग चुंबकीय गड़बड़ी की बात करते हैं, जिससे कंपास गलत दिशा दिखाने लगता है, हालांकि वैज्ञानिक मानते हैं कि यह क्षेत्र चुंबकीय रूप से असामान्य नहीं है। वहीं कुछ शोधकर्ताओं ने समुद्र के नीचे मौजूद मीथेन गैस को भी संभावित कारण बताया है, जो अचानक बाहर निकलकर जहाजों और विमानों को प्रभावित कर सकती है। इन सबके अलावा मानवीय भूल भी एक बड़ी वजह मानी जाती है। सुदामा/ईएमएस 10 जनवरी 2026