राज्य
10-Jan-2026
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कोरबा (ईएमएस) राज्य में भारत निर्वाचन आयोग द्वारा किए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) को लेकर आम आदमी पार्टी द्वारा कहा गया है कि पार्टी द्वारा मतदाता सूची में अनियमितता पर गहरी चिंता और कड़ा विरोध दर्ज किया है। कोरबा जिला अध्यक्ष रिचर्ड डेविड लोगन ने कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता के नाम पर चल रही यह प्रक्रिया ज़मीनी स्तर पर भारी गड़बड़ियों, अव्यवस्था और गंभीर लोकतांत्रिक उल्लंघनों से ग्रस्त लग रही है। आम आदमी पार्टी का स्पष्ट आरोप है कि एसआईआर के दौरान हजारों पात्र, जीवित और स्थायी नागरिकों के नाम बिना कारण, बिना सूचना और बिना सुनवाई के मतदाता सूची से हटाए गए हैं, जो सीधे-सीधे नागरिकों के संवैधानिक मताधिकार पर हमला है। छत्तीसगढ़ में राज्य के 27 लाख 34 हजार से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए जाने पर आम आदमी पार्टी कड़ा ऐतराज जताती है। आरोप लगाते हुए आगे कहा गया कि प्रदेश के अलग-अलग जिलों से अब तक 2 लाख 74 हजार से ज्यादा प्रदेशवासियों ने वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने के लिए फॅार्म भरा है। राज्य में 7 नवंबर से शुरू हुई यह प्रक्रिया मात्र 45 दिन तक चली, जबकि इसे कम से कम 6 महीने करना था और जिन लोगों के नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं हैं, उन्हें इलेक्शन कमीशन की तरफ से नोटिस देकर अपने नाम दोबारा जुड़वाने का पर्याप्त समय नहीं दिया गया है। दावे/आपत्तियां 23 दिसंबर 2025 से 22 जनवरी 2026 तक ही रखी गयी है। सुनवाई और वेरिफिकेशन 23 दिसंबर 2025 से 14 फरवरी 2026 तक होंगे। अंतिम वोटर लिस्ट 21 फरवरी 2026 को पब्लिश की जाएगी। इसके लिए भी कम समय दिया गया है इसे 6 महीने बढ़ाया जाये। आयोग के सरकारी आंकड़े अनुसार जब 2003 में एसआईआर हुआ था उस समय मतदाता कम होने के बावजूद 8 महीने की समय सीमा रखी गयी थी तो अभी जब मतदाता भी बढ़े हैं तो इतनी कम समय सीमा क्यों जारी SIR लिस्ट में में बहुत खामियाँ और गड़बड़ियाँ हैं। बिना कारण नाम हटाए जाना सबसे गंभीर अपराध है। वर्षों से मतदान कर रहे मतदाताओं के नाम अचानक गायब हैं न कोई नोटिस, न कारण, न सुनवाई, यह प्रक्रिया असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक है। बीएलओ सत्यापन केवल कागज़ों में, सत्यापन पूरी तरह असफल है। घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन कई क्षेत्रों में नहीं हुआ है, जबकि रिपोर्ट में सत्यापन “पूर्ण” दर्शाया गया है। नागरिकों से न मुलाकात हुई न हस्ताक्षर कराये गये। छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में, जहाँ आदिवासी अंचल, घने जंगल, दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्र और सीमित परिवहन हैं, वहाँ एसआईआर की समय-सीमा व्यवहारिक वास्तविकताओं के बिल्कुल विपरीत रखी गयी। आम जनता को एसआईआर की जानकारी तक नहीं मिल पायी। न व्यापक प्रचार, न ग्राम सभा/स्थानीय सूचना तंत्र, अधिकांश मतदाताओं को पता ही नहीं चला कि एसआईआर चल रहा था। डिजिटल प्रक्रिया से गरीब, बुज़ुर्ग और ग्रामीण बाहर, ओटीपी, ऑनलाइन फॉर्म, ऐप आधारित सिस्टम, डिजिटल संसाधनों से वंचित नागरिक पूरी तरह प्रभावित रहे। आधार को लेकर भ्रम और दबाव रहा जबकि आधार अनिवार्य नहीं है। फिर भी कई जगह आधार न होने पर नाम कटने का भय दिखाया गया। मतदाताओं में डर और असमंजस का माहौल बना रहा। बाहरी राज्यों के नाम जुड़ने की शिकायतें भी आयी। ऐसे नाम जोड़े गए जिनका छत्तीसगढ़ से वास्तविक निवास संबंध संदिग्ध था स्थानीय नागरिकों के नाम हटाए गए।वहीं डुप्लीकेट जांच के लिए पारदर्शी तकनीकी टूल का अभाव रहा। जवाबदेही और पारदर्शिता शून्य रही। किस अधिकारी ने नाम हटाने का निर्णय लिया स्पष्ट नहीं बताया गया। मतदाता को कारण बताने की कोई व्यवस्था नहीं रही। आम आदमी पार्टी की स्पष्ट मांग अंतर्गत कहा गया कि वर्तमान एसआईआर प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रोका जाए। नामों की पहचान, जोड़ना/हटाना और देशभर की तुलना में एसआईआर प्रक्रिया पारदर्शी नहीं लग रही है। बिना कारण हटाए गए सभी नाम अस्थायी रूप से तुरंत बहाल किए जाएँ। पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए, बीएलओ और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।दावा/आपत्ति की समय-सीमा को यथार्थवादी रूप से बढ़ाया जाए। आधार को लेकर स्पष्ट लिखित निर्देश जारी हों कि यह अनिवार्य नहीं है। ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्रों में ऑफलाइन विशेष शिविर लगाए जाएँ। आगे चेतावनी देते हुए कहा गया कि आम आदमी पार्टी स्पष्ट करती है कि मतदाता सूची से एक भी पात्र नागरिक का नाम हटना लोकतंत्र के लिए अस्वीकार्य है। यदि निर्वाचन आयोग ने तत्काल सुधारात्मक कदम नहीं उठाए, तो आम आदमी पार्टी इस मुद्दे को सड़क से सदन तक उठाएगी। मताधिकार कोई एहसान नहीं। यह भारत के संविधान द्वारा प्रदत्त मूल अधिकार है। 10 जनवरी / मित्तल