सीधी(ईएमएस)। जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच के फासले को उजागर करती है। यहां के ब्योहारी में आयोजित मुख्यमंत्री के एक कार्यक्रम में अपनी पढ़ाई के लिए मदद की गुहार लगाने पहुंची एक गरीब आदिवासी छात्रा का दर्द उस वक्त छलक पड़ा, जब वह कड़ी सुरक्षा और व्यस्तता के कारण मुख्यमंत्री से नहीं मिल पाई। हाथ में अपनी उम्मीदों का आवेदन लिए वह घंटों कोशिश करती रही, लेकिन जब मंच तक पहुंचने का रास्ता नहीं मिला, तो वह कार्यक्रम स्थल पर ही फूट-फूटकर रोने लगी। यह छात्रा सीधी जिले के आदिवासी बहुल क्षेत्र चिनगवाह गांव की रहने वाली अनामिका है, जो विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समुदाय से आती है। अनामिका का सपना पढ़-लिखकर डॉक्टर बनने का है ताकि वह अपने समाज और देश की सेवा कर सके। हालांकि, उसके इस सपने के आगे गरीबी की एक बड़ी दीवार खड़ी है। अनामिका के पिता मजदूरी करते हैं, जिनसे बमुश्किल घर का गुजारा हो पाता है। ऐसे में मेडिकल की पढ़ाई के लिए लगने वाली भारी-भरकम फीस और संसाधनों का इंतजाम करना इस परिवार के लिए नामुमकिन जैसा है। रोते हुए अनामिका ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि वह पढ़ना चाहती है, लेकिन आर्थिक तंगी उसके भविष्य पर भारी पड़ रही है। उसने बताया कि यह पहली बार नहीं है जब उसने मदद की गुहार लगाई हो। इससे पहले वह अपनी पढ़ाई के खर्च के लिए क्षेत्रीय विधायक, सांसद और जिला कलेक्टर के चक्कर भी काट चुकी है, लेकिन हर जगह से उसे केवल आश्वासन मिला, कोई ठोस आर्थिक सहायता नहीं। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को उसने अपनी आखिरी उम्मीद माना था। उसे लगा था कि शायद सूबे के मुखिया की नजर उस पर पड़ जाए और किसी सरकारी योजना या छात्रवृत्ति के जरिए उसकी पढ़ाई का रास्ता साफ हो जाए। कार्यक्रम के दौरान अनामिका ने वहां तैनात महिला पुलिसकर्मियों से मुख्यमंत्री से मिलने की कई बार मिन्नतें कीं। सुरक्षा प्रोटोकॉल और सख्त घेराबंदी का हवाला देते हुए पुलिसकर्मियों ने उसे आगे नहीं जाने दिया। घंटों की जद्दोजहद के बाद जब उसे अहसास हुआ कि उसकी फरियाद मुख्यमंत्री तक नहीं पहुंच पाएगी, तो वह मंच से दूर खड़ी होकर ही रोने लगी। इस दृश्य ने वहां मौजूद लोगों को झकझोर कर रख दिया। अब छात्रा के रोने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है, जिसमें वह अपनी गरीबी और डॉक्टर बनने की अधूरी इच्छा का जिक्र कर रही है। सोशल मीडिया पर लोग छात्रा के प्रति सहानुभूति जता रहे हैं और सवाल उठा रहे हैं कि बैगा जैसी विशेष संरक्षित जनजाति से आने वाली मेधावी छात्रा को अब तक शासन की योजनाओं का लाभ क्यों नहीं मिला। अनामिका की आंखों में अब भी एक उम्मीद बाकी है कि शायद इस वीडियो के जरिए उसकी आवाज शासन-प्रशासन के कानों तक पहुंचेगी और उसकी प्रतिभा को आर्थिक अभाव के कारण दम नहीं तोड़ना पड़ेगा। फिलहाल, एक गरीब बेटी का डॉक्टर बनने का सपना व्यवस्था की चौखट पर न्याय की गुहार लगा रहा है। वीरेंद्र/ईएमएस/10जनवरी2026