वाराणसी (ईएमएस)। राजीव गांधी दक्षिणी परिसर,काoहिoविओ विo में सुलभ एवं उच्च उपज वाली तेल निष्कर्षण प्रौद्योगिकी का शुभारंभ मिर्जापुर, उत्तरप्रदेश (09-01-2026), कृषि नवाचार एवं ग्रामीण सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के राजीव गांधी दक्षिणी परिसर (राoगाँoदoपo) ने एक अत्याधुनिक, स्वदेश में विकसित भाप आसवन इकाई का सफलतापूर्वक संचालन शुरू किया है। यह सुविधा औषधीय एवं सुगंधित पौधों से वैज्ञानिक तरीके से उच्च गुणवत्ता वाले औषधीय और सुगंधित पदार्थों का निष्कर्षण करने के लिए समर्पित है। सहयोगात्मक विशेषज्ञता के प्रतीक इस परियोजना का नेतृत्व राoगाँoदoपo, काoहिoविoविo के आचार्य प्रभारी प्रोo बीoएमoएनo कुमार ने किया, तथा इसे फार्म इंचार्ज, डॉo शशिधर केo एसo और फार्म प्रबंधन समिति द्वारा क्रियान्वित किया गया। तकनीकी एवं उद्यानिकी डिजाइन राoगाँoदoपo में उद्यानिकी के अतिथि शिक्षक, डॉo बिपिन कुमार सिंह के विशेष मार्ग दर्शन में आरंभ किया गया। यह बहुउद्देशीय इकाई कृषि समुदाय के लिए एक क्रांतिकारी कदम है, जो पामारोसा, जरेनियम, मेंथा (पुदीना), तुलसी, गुलाब, लैवेंडर, सिट्रोनेला, चमेली, वेटिवर, और यहाँ तक कि चंदन जैसे पौधों को कुशलता से संसाधित करने में सक्षम है। यह स्थानीय स्तर पर उगाई गई जैव-सामग्री को मूल्यवान औषधीय एवं सुगंधित तत्वों में परिवर्तित करते हुए नई आर्थिक संभावनाओं का सृजन करती है और फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करती है। यह सुविधा स्थानीय उत्पादकों के लिए एक वरदान है। किसान अब अपनी सुगंधित फसल का प्रसंस्करण न्यूनतम, निर्धारित शुल्क पर राoगाँoदoपo, काoहिoविoविo में करवा सकते हैं, जो उनके द्वार पारदर्शिता, सामर्थ्य और मूल्य संवर्धन लाती है। इसकी प्रसंस्करण क्षमता: प्रति बैच 5 क्विंटल (500 किग्रा) की क्षमता के साथ, यह इकाई दक्षता के लिए डिजाइन की गई है, जो व्यावहारिक कृषि पैमाने को पूरा करने वाले बड़े पैमाने पर प्रसंस्करण को सक्षम बनाती है। इस इकाई के सफल शुभारंभ के अवसर पर फार्म इंचार्ज डॉo शशिधर एवं सदस्य डॉo त्रियुगीनाथ, डॉo कंचन पडवाल, डॉo सविता देवांगन, डॉo कौस्तुभ किशोर सराफ, डॉo कृतिमंडल, डॉo अजीत सिंह, डॉo आलोक सिंह, डॉo अभिनव सिंह, डॉo विपिन सिंह, डॉo गिरीश तंतुवे, डॉo अजीत कुमार और डॉo प्रमोद कुमार प्रजापति उपस्थित रहे। इस परियोजना ने पूर्व फार्म अधीक्षक, डॉo राजीव त्रिपाठी के मूलभूत योगदान को भी स्वीकार किया है। आचार्य प्रभारी प्रोo बीoएमoएनo कुमार ने इस परियोजना के पीछे के दृष्टिकोण पर जोर देते हुए कहा: “यह पहल शैक्षणिक ज्ञान को मूर्त सामुदायिक लाभ में अनुवादित करने की काoहिoविoविo की मूल प्रतिबद्धता को दर्शाती है। आवश्यक तेल निष्कर्षण प्रौद्योगिकी तक पहुँच को सार्वभौमिक बनाकर, हम सीधे तौर पर किसानों को अपनी आय बढ़ाने, टिकाऊ कृषि को अपनाने और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सक्षम बना रहे हैं। यह आत्मनिर्भर कृषि के दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में एक ठोस कदम है।“ डॉ नरसिंह राम, 10 जनवरी, 2026