देश में समय-समय पर कर्ज़ माफी की घोषणाएं होती रही हैं। किसान ऋण माफी ओर कुछ खास क्षेत्रों के कर्ज़ पुनर्गठन को लेकर जब यह सवाल उठता है, बैंक द्वारा दिए गए लोन माफ कर दिए गए। इसको लेकर आम जनता के मन में एक स्वाभाविक चिंता पैदा होती है।क्या बैंकों में जमा आम लोगों का पैसा, खासकर बचत खाता और फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी), में सुरक्षित रहेगा? बैंक आम जनता से जमा राशि लेते हैं। यही पैसा वे फिक्स्ड डिपॉजिट, बचत खाते और चालू खातों के रूप में स्वीकार करते हैं। इसी जमा राशि के आधार पर बैंक विभिन्न तरह के लोन देते हैं। होम लोन, पर्सनल लोन, गोल्ड लोन और उद्योगों को ऋण देते हैं। बैंक जमा राशि पर कम ब्याज देते हैं। लोन पर अधिक ब्याज वसूल करते हैं। इस ब्याज के अंतर की आय से ही बैंक संचालित होते हैं। जमाकर्ताओं को समय पर ब्याज और मूलधन लौटाते हैं। सरकारी क्षेत्र के बैंक राष्ट्रीयकृत बैंक हैं। आम जनता इन पर भरोसा करती है। सरकार और बैंकों ने पिछले कुछ वर्षों में कारपोरेट जगत के लगभग 16 लाख करोड़ के लोन बट्टे खाते में डाले हैं। बैंकों ने शेयर बाजार में भी भारी निवेश किया है। उद्योग जगत को लोन सबसे ज्यादा दिया है। इससे लोगों में आशंका है, यदि शेयर बाजार में गिरावट आई, तो बैंकों में जमा उनका पैसा सुरक्षित रहेगा या नहीं। जब किसी वर्ग विशेष का लोन माफ किया जाता है। यह अक्सर “पूर्ण माफी” नहीं होती है। अधिकतर मामलों में सरकार उस लोन की भरपाई बैंकों को सरकारी खजाने से करती है। सरकार बैंकों को जो राशि देती है। जिससे बैंक मैं जमा राशि पर कोई सीधा असर न पड़े। जमाकर्ताओं का पैसा सुरक्षित रहे। इसलिए आम जमाकर्ताओं की जमा राशि पर इसका सीधा खतरा आमतौर पर नहीं होता है। यदि कोई बैंक बड़े पैमाने पर खराब कर्ज़ (एनपीए) से जूझ रहा हो। सरकार या रिज़र्व बैंक समय पर हस्तक्षेप न करे। तब जोखिम बढ़ सकता है। बैंक भी कंपनी एक्ट के अंतर्गत काम कर रहे हैं। इनके ऊपर भी दिवालिया कानून लागू होता है। इसी जोखिम को कम करने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) बैंकों पर सख्त निगरानी रखता है। इसके अलावा, डिपॉजिट पर इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (डीआइसीजीसी) के तहत हर जमाकर्ता को प्रति बैंक 5 लाख रुपये तक की जमा राशि की बीमा सुरक्षा प्राप्त है। बीमा कंपनियों और बैंकों के निवेश को लेकर समय समय पर सवाल उठते हैं। यह सही है,बैंक, बीमा कंपनियां जमा पैसा शेयर बाजार और अन्य निवेश माध्यमों में लगाती हैं। यह निवेश सख्त नियमों और जोखिम प्रबंधन के तहत होते हैं। बैंकों की जमा राशि सीधे शेयर बाजार में नहीं लगाई जाती है। इस तरह की निवेश पर रिजर्व बैंक और सरकार का नियंत्रण रहता है। सुरक्षित और नियामकीय ढांचे के भीतर शेयर बाजार में निवेश होता है। राष्ट्रीयकृत बैंकों में सबसे ज्यादा निवेश सरकार का होता है। ऐसी स्थिति में सरकार की भी जिम्मेदारी होती है। वह आम नागरिकों के हितों का संरक्षण करें। साथ ही शासन का जो पैसा लगा हुआ है। वह भी सुरक्षित रखे। रिजर्व बैंक ने हाल ही में मुनाफे पर 75 फ़ीसदी डिविडेंड का प्रस्ताव किया है। इसके कारण लोगों की चिंता बढ़ रही है। अभी तक शेयर होल्डर को 40 फ़ीसदी ही मुनाफे की राशि डिविडेंड के रूप में दी जाती थी। जिसके कारण बैंकों के पास जमा पूंजी ज्यादा होती थी। यदि ऐसा हुआ तो आगे चलकर बैंकों की आर्थिक स्थिति जैसी आज मजबूत है वैसी भविष्य में रहेगी या नहीं इसको लेकर लोगों में डर और भय देखने को मिल रहा है। ईएमएस / 11 जनवरी 26