मंडला (ईएमएस)। आदिवासी बाहुल्य जिले मंडला में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका ताजा उदाहरण जनपद पंचायत घुघरी की ग्राम पंचायत कुसमी में देखने को मिल रहा है। यहाँ निर्माणाधीन नवीन ग्राम पंचायत भवन तकनीकी धांधली और सरपंच की मनमानी का गवाह बन गया है। स्वीकृत नक्शे को ताक पर रखकर किए जा रहे निर्माण कार्य ने प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया गया कि पंचायत भवन के स्वीकृत मास्टर प्लान के अनुसार भवन की मजबूती के लिए कुल 37 कॉलम (पिलर) बनाए जाने थे। लेकिन हैरानी की बात है कि मौके पर केवल 29 कॉलम ही खड़े किए गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सरपंच भोला मरावी ने भ्रष्टाचार के चलते 8 मुख्य कॉलम गायब कर दिए हैं। बिना कॉलम के बन रहा यह भवन भविष्य में किसी बड़े हादसे को न्यौता दे सकता है। भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले ग्रामीणों के साथ सरपंच का व्यवहार संदेहास्पद है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण स्थल पर किसी को आने नहीं दिया जाता। सवाल पूछने पर झूठी एफआईआर कराकर जेल भेजने की धमकी दी जाती है। विरोध दबाने के लिए कुछ ग्रामीणों पर पहले ही फर्जी मामले दर्ज कराए जा चुके हैं। ग्रामीणों ने बताया कि निर्माण में मानक रेत के स्थान पर मिट्टी युक्त घटिया रेत का उपयोग हो रहा है। दीवारों पर पानी की तराई तक नहीं की गई है, लेकिन भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा देखिए कि बिना तराई किए ही 30 हजार रुपये का पानी टैंकर का फर्जी बिल निकाल लिया गया। ग्रामीण परशुराम बंजारा का आरोप है कि जब भी पंचायत का निर्माण कार्य शुरू होता है, सरपंच अपने घर का काम भी शुरू कर देता है। ग्रामीणों को संदेह है कि सरकारी सामग्री और कॉलम का उपयोग सरपंच अपने निजी हित में कर रहा है। इस मामले में विरोधाभासी बयान सामने आ रहे हैं। निर्माण देख रहे मैट गणेश यादव ने स्वीकार किया कि बाउंड्री वॉल के 8 कॉलम नहीं बनाए गए हैं। वहीं उपयंत्री डीपी अहिरवार का दावा है कि काम गुणवत्तापूर्ण है, लेकिन मौके से गायब 8 कॉलमों पर उनके पास कोई संतोषजनक जवाब नहीं है। ग्रामीण गंगाराम धुर्वे, पालन सिंह समेत ग्राम के अन्य जागरूक ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और कलेक्टर से मांग की है कि निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए और गायब कॉलमों के साथ गुणवत्ताविहीन कार्य करने वाले सरपंच व संबंधित अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।