मनोरंजन
12-Jan-2026
...


- इतिहास के झरोखे से मुंबई (ईएमएस)। बॉलीवुड के दिवंगत अभिनेता इरफान खान अपने व्यक्तित्व और जीवन के संघर्षों को लेकर हमेशा याद किए जाएंगे। राजस्थान के जयपुर में 7 जनवरी 1967 को जन्मे इरफान खान ने अपने करियर में कठिनाइयों और संघर्षों को चुनौती मानकर खुद को साबित किया। उनका परिवार किसी क्रिएटिव पृष्ठभूमि से नहीं था, इसलिए एक्टिंग का सपना देखना उनके लिए अपने आप में बड़ा जोखिम था। इरफान खुद कहते थे, “मैंने कुछ फिल्में देखीं और एक्टर बनने का सपना देख लिया। ये मेरे जीवन का सबसे बड़ा रिस्क था।” इरफान के शुरुआती दिन आसान नहीं थे। नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) में दाखिला लेने के समय उनके पिता का निधन हो गया, जिससे आर्थिक मदद बंद हो गई। बावजूद इसके उन्होंने हार नहीं मानी और एनएसडी की फेलोशिप के जरिए अपना कोर्स पूरा किया। एक्टिंग की शुरुआत से पहले उन्हें मुंबई में इलेक्ट्रिशियन का काम करना पड़ा। बताया जाता है कि उन्हें राजेश खन्ना के घर एसी ठीक करने का मौका मिला और पहली बार बड़े अभिनेता को देखने की खुशी का ठिकाना नहीं था। इरफान ने छोटे पर्दे से अपने करियर की शुरुआत की। 1985 में दूरदर्शन का सीरियल श्रीकांत उनके लिए पहला महत्वपूर्ण अनुभव साबित हुआ। इसके अलावा उन्होंने भारत एक खोज, चाणक्य, चंद्रकांता, सारा जहां हमारा, बनेगी अपनी बात और संजय खान के जय हनुमान जैसे धारावाहिकों में भी काम किया। जय हनुमान में उन्होंने महर्षि वाल्मीकि का किरदार निभाया, जिसमें उनके वाल्मीकि बनने से पहले का डाकू वाला पार्ट दर्शाया गया था। इस भूमिका को लेकर पंजाब के वाल्मीकि समाज में कुछ विरोध भी हुआ। इरफान की असली पहचान 2006 में फिल्म द नेमसेक से मिली। इस फिल्म की शूटिंग के दौरान उन्हें अमेरिका में छह महीने बिताने के लिए केवल 10 लाख रुपए मिले थे, लेकिन उन्होंने अपने आत्मविश्वास और मेहनत से इसे चुनौती नहीं बनने दिया। इसके बाद उन्होंने कई यादगार फिल्मों में अभिनय किया, जिनमें द लंच बॉक्स, पीकू, मदारी, कारवां, ब्लैकमेल, अंग्रेजी मीडियम और करीब करीब सिंगल शामिल हैं। उनकी अदाकारी की सबसे खास बात यह थी कि वे हर किरदार में जीवन की सच्चाई और भावनाओं को इतनी सहजता से पेश करते थे कि दर्शक किरदार से जुड़ जाते थे। उनकी आंखों में भाव, आवाज में ताकत और चुप्पी में भी कहानी समाई रहती थी। इरफान खान न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। इसके बावजूद उन्होंने फिल्मों और अभिनय के प्रति अपना समर्पण नहीं छोड़ा। उनके संघर्ष, मेहनत और प्रतिभा ने उन्हें केवल भारत ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान दिलाई। 29 अप्रैल 2020 को इरफान खान ने इस दुनिया को अलविदा कहा, लेकिन उनकी अदाकारी और उनके किरदार हमेशा जीवित रहेंगे। उनका सफर यह साबित करता है कि सच्ची प्रतिभा, सादगी और आत्मविश्वास किसी भी चुनौती को पार कर सकता है और दर्शकों के दिलों में अमिट छाप छोड़ सकता है। सुदामा/ईएमएस 12 जनवरी 2026