वॉशिंगटन(ईएमएस)। ईरान में जारी जन-आक्रोश अब एक खौफनाक मंजर में तब्दील हो चुका है। सड़कों पर हिंसा, लाशों के ढेर और जेलों में बंद हजारों प्रदर्शनकारियों की चीखें पूरी दुनिया को दहला रही हैं। मानवाधिकार संगठनों द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, मरने वालों की संख्या 500 के पार पहुंच गई है, जिनमें लगभग 490 आम नागरिक और दर्जनों सुरक्षाकर्मी शामिल हैं। वहीं, 10,000 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है। इस बीच, सात समंदर पार अमेरिका में एक ऐसी हलचल शुरू हुई है, जो ईरान की सत्ता के लिए अंतिम चेतावनी साबित हो सकती है।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में एक अत्यंत गोपनीय सीक्रेट मीटिंग बुलाई है। इस बैठक का मुख्य एजेंडा ईरान के खिलाफ सैन्य विकल्पों पर विचार करना है। ट्रंप ने पहले ही सोशल मीडिया पर स्पष्ट कर दिया है कि ईरान की जनता आजादी की ओर देख रही है और अमेरिका उनकी मदद के लिए पूरी तरह तैयार है। जानकार इसे तेहरान के लिए खतरे की घंटी मान रहे हैं। ट्रंप की मेज पर कई खतरनाक विकल्प रखे गए हैं, जिनमें सीधे मिसाइल हमलों से लेकर गुप्त साइबर ऑपरेशनों के जरिए ईरान के सैन्य और परमाणु ठिकानों को पंगु बनाना शामिल है। इसके अलावा, ईरान की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ने के लिए और भी कड़े प्रतिबंधों की तैयारी की जा रही है। इधर, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी इस स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि ईरान के वीरों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। ईरान सरकार इन प्रदर्शनों को विदेशी साजिश करार दे रही है, जबकि वैश्विक समुदाय इसे जनता का खुला कत्लेआम बता रहा है। जमीनी हिंसा के साथ-साथ अब एक अदृश्य डिजिटल युद्ध भी छिड़ गया है। तकनीकी विशेषज्ञों ने एक भयानक डिजिटल जाल को लेकर चेतावनी जारी की है। खबरों के मुताबिक, हैकर्स ने ईरान की ताजा स्थिति और टीवी लाइव प्रसारण का झांसा देने वाले फर्जी लिंक फैलाए हैं। यह हमला इतना आधुनिक है कि इसमें किसी बटन को क्लिक करने की भी जरूरत नहीं पड़ती। ड्राइव-बाय अटैक के जरिए वेबसाइट खोलते ही खतरनाक जावा स्क्रिप्ट कोड यूजर के मोबाइल या लैपटॉप में प्रवेश कर जाता है। इसके जरिए पत्रकारों, कार्यकर्ताओं और आम लोगों के पासवर्ड चुराए जा रहे हैं और उनकी लोकेशन ट्रेस की जा रही है। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि किसी भी संदिग्ध लिंक से दूर रहें और सुरक्षा के लिए अपने डिजिटल खातों के पासवर्ड तुरंत बदल लें। अब पूरी दुनिया की नजरें मंगलवार को होने वाली अमेरिकी बैठक पर टिकी हैं, जो इस संघर्ष की दिशा तय करेगी। वीरेंद्र/ईएमएस/12जनवरी2026 -----------------------------------