राज्य
12-Jan-2026
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भोपाल में दलित-आदिवासी संगठनों का साझा मंथन, समावेशी परामर्श से भोपाल डिक्लेरेशन-2 बनाने की प्रक्रिया प्रारंभ भोपाल (ईएमएस) । देश में आज संविधान और लोकतंत्र खतरे में हैं। महंगाई और बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है, जिससे एससी एसटी वर्ग सबसे अधिक प्रभावित हो रहा है। इसलिए एक बार फिर भोपाल डिक्लेरेशन की जरूरत है। भोपाल डिक्लेरेशन के 25 वर्ष पूरे होने से पहले देशभर के दलित और आदिवासी संगठनों ने एक बार फिर साझा मंथन की पहल की है। इसी कड़ी में सोमवार को राजधानी भोपाल में भोपाल डिक्लेरेशन-2Ó का ड्राफ्टिंग सत्र आयोजित किया गया। इस विशेष सत्र में पूर्व मुख्यमंत्री व राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह, वरिष्ठ नेता फूल सिंह बरैया, डॉ. विक्रांत भूरिया, सज्जन सिंह वर्मा, ओमकार सिंह मरकाम समेत देशभर से आए बुद्धिजीवी और विषय विशेषज्ञ शामिल हुए। ड्राफ्टिंग सत्र के उपरांत कमेटी ने पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए भोपाल डिक्लेरेशन-2Ó की आवश्यकता और इससे जुड़े अन्य मुद्दों पर चर्चा की। सिंह ने कहा कि वर्ष 2002 में जो भोपाल डिक्लेरेशन-1Ó हुआ था, उसे दलित एजेंडा नाम दिया गया था, लेकिन उसमें एससी एसटी दोनों वर्गों के मुद्दे शामिल थे। इसका मूल उद्देश्य यह था कि अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के जो युवा रोजगार के योग्य हो चुके हैं, उन्हें नौकरियां मिलें। शासकीय खरीद में आरक्षण दिया जाए और एससी एसटी वर्ग को पट्टे प्रदान किए जाएं। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने एससी एसटी वर्ग के डिग्री और डिप्लोमा धारकों को बिना टेंडर के कॉन्ट्रैक्ट देना शुरू किया था, जिससे हजारों बेरोजगारों को ठेके मिले। तीन लाख से अधिक लोगों को पट्टे बांटे गए और शासकीय जमीनों पर दबंगों के कब्जे हटाकर एससी एसटी वर्ग को पट्टे दिए गए। भोपाल डिक्लेरेशन को पूरे देश में समझा गया और कई राज्यों में इसे लागू भी किया गया, हालांकि डेढ़ साल में किसी भी नीति को पूरी तरह लागू कर पाना आसान नहीं होता। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि भोपाल डिक्लेरेशन-2Ó का ड्राफ्ट तैयार किया जाए। मध्य प्रदेश चैप्टर का ड्राफ्ट लगभग तैयार हो चुका है। प्रथम सत्र में तय एजेंडे पर पांच सौ से अधिक लोगों के साथ अगले सत्र में चर्चा होगी और 13 जनवरी 2027 को फाइनल भोपाल डिक्लेरेशन-2 जारी किया जाएगा। इस दौरान अलग-अलग राज्यों में जिला स्तर पर सुझाव लिए जाएंगे और उन्हें ड्राफ्ट में शामिल किया जाएगा। साथ ही त्रद्गठ्ठ-र्ं से भी संवाद कर उनके विचारों को समझा जाएगा। उन्होंने कहा कि स्ष्ट-स्ञ्ज वर्ग के लिए यूथ पॉलिसी बनाना आज की आवश्यकता है। दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट किया कि यह किसी पार्टी विशेष का कार्यक्रम नहीं है। आयोजकों ने भाजपा के दलित और आदिवासी वर्ग के नेताओं को भी आमंत्रित किया था, लेकिन वे शामिल नहीं हुए। इस दौरान बहुजन इंटेलेक्ट संगठन के मनोज राजे ने कहा कि वर्ष 2002 में ऐतिहासिक भोपाल डिक्लेरेशन लॉन्च किया गया था, जिसके कई प्रावधान लागू हुए और एससी एसटी वर्ग को इसका व्यापक लाभ मिला। इसी कारण बहुजन इंटेलेक्ट, आदिवासी सेवा मंडल और डोमा परिषद ने मिलकर भोपाल डिक्लेरेशन-2 बनाने का निर्णय लिया। उन्होंने बताया कि चूंकि दिग्विजय सिंह के कार्यकाल मंक भोपाल डिक्लेरेशन लागू हुआ था, इसलिए सभी संगठनों ने सर्वसम्मति से उनसे कार्यक्रम की अध्यक्षता करने का आग्रह किया। राजे ने बताया कि ड्राफ्टिंग सत्र के पहले दिन 60 से अधिक विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान यह समीक्षा की गई कि भोपाल डिक्लेरेशन के कितने बिंदु लागू हुए और जो लागू नहीं हो सके, उसके पीछे क्या कारण रहे, ताकि आगे की रणनीति स्पष्ट हो सके। यह पहली बैठक थी, जिसमें ड्राफ्टिंग से जुड़े सुझाव एकत्र किए गए। विधायक फूल सिंह बरैया ने कहा कि भोपाल डिक्लेरेशन-1 से एससी एसटी वर्ग को काफी लाभ हुआ था, लेकिन 2003 में सरकार बदलते ही उन नीतियों को समाप्त कर दिया गया। उन्होंने कहा कि आज आदिवासियों से जल, जंगल और जमीन छीनी जा रही है, वहीं एससी वर्ग के साथ अत्याचार चरम पर हैं। एससी एसटी वर्ग की बेहतरी के लिए बजट का अभाव है, इसलिए भोपाल डिक्लेरेशन-2 आज की जरूरत है। डॉ. विक्रांत भूरिया और ओमकार सिंह मरकाम ने कहा कि भोपाल डिक्लेरेशन-2 की आवश्यकता इसलिए पड़ी है क्योंकि एससी-एसटी वर्ग के अधिकार अब भी अधूरे हैं और उनके साथ अन्याय जारी है। भाजपा शासन में अत्याचार बढ़े हैं, जिसके चलते सभी को एक मंच पर आकर इस संघर्ष को नई धार देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यह कोई राजनीतिक लड़ाई नहीं, बल्कि अधिकारों की लड़ाई है। पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पा रहा और कई मामलों में पुलिस कार्रवाई तक नहीं होती। आरोपी थानों में बैठकर पीड़ितों को धमकाते हैं। जनप्रतिनिधियों की बात भी अनसुनी की जा रही है, इसलिए भोपाल डिक्लेरेशन-2 समय की मांग है। उल्लेखनीय है कि इस कार्यक्रम का संयोजन बहुजन इंटेलेक्ट, आदिवासी सेवा मंडल और डोमा परिषद द्वारा किया जा रहा है। इसके साथ ही अनुसूचित जाति-जनजाति से जुड़े कई अन्य सामाजिक संगठन भी इसमें सहभागी हैं। ड्राफ्टिंग प्रक्रिया के तहत देशभर के सामाजिक कार्यकर्ताओं, प्रशासकों, नीति-निर्माताओं, बुद्धिजीवियों और राजनीतिक प्रतिनिधियों से चरणबद्ध परामर्श किया जा रहा है। इस सामूहिक मंथन का उद्देश्य भोपाल डिक्लेरेशन की उपलब्धियों की समीक्षा करते हुए सामाजिक न्याय, संवैधानिक मूल्यों की रक्षा, भूमि अधिकार, शिक्षा, रोजगार, राजनीतिक भागीदारी और आर्थिक सशक्तिकरण से जुड़ा एक भविष्यपरक साझा एजेंडा तैयार करना है। आशीष पाराशर, 12 जनवरी, 2026