ज़रा हटके
13-Jan-2026
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बीजिंग (ईएमएस)। चीन और वियतनाम जैसे देशों में सांप, मगरमच्छ और अन्य सरीसृप पालने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। हालांकि, कई बार यह शौक जानलेवा साबित हो जाता है। चीन की राजधानी बीजिंग में रहने वाले हुआंग नाम के एक व्यक्ति को बचपन से ही सांपों में गहरी दिलचस्पी थी। इसी लगाव के चलते उसने एक बेहद जहरीला ‘लॉन्ग-नोज्ड वाइपर’ सांप पाल रखा था। इस सांप को चीन में ‘फाइव स्टेप स्नेक’ भी कहा जाता है। लोककथाओं में माना जाता है कि इसके काटने के बाद इंसान केवल पांच कदम चल पाता है और उसकी मौत हो जाती है। भले ही यह एक कहावत हो, लेकिन इस सांप का जहर वास्तव में बेहद खतरनाक माना जाता है। एक दिन हुआंग का पालतू सांप बीमार पड़ गया और खुद से खाना नहीं खा पा रहा था। सांप के प्रति हमदर्दी दिखाते हुए हुआंग ने उसे हाथों से खाना खिलाने का फैसला किया। इसी दौरान सांप ने अचानक उसके अंगूठे को काट लिया। कुछ ही समय में जहर शरीर में फैलने लगा और उसकी हालत बिगड़ती चली गई। जब हुआंग को अस्पताल ले जाया गया, तो डॉक्टरों ने पाया कि जहर ने खून जमने की प्रक्रिया पर सीधा असर डाला है। डॉक्टरों के अनुसार, सांप के काटने से हुआंग के अंगूठे में नेक्रोसिस यानी कोशिकाओं के मरने की प्रक्रिया शुरू हो गई थी और मांस सड़ने लगा था। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी थी कि उनकी जान बचाने के लिए डॉक्टरों को अंगूठा काटना पड़ा। समय पर इलाज मिलने से उनकी जान तो बच गई, लेकिन उन्हें अपने खतरनाक शौक की भारी कीमत चुकानी पड़ी। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि चीन में इन दिनों ‘एक्सोटिक पेट्स’ का चलन तेजी से बढ़ा है, जो इंसानी जान के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। शेनझेन सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के वरिष्ठ डॉक्टर लियू वेई ने चेतावनी दी है कि सांप, छिपकली और अन्य सरीसृप अपने साथ खतरनाक बैक्टीरिया, वायरस और परजीवी लेकर चलते हैं। इनसे साल्मोनेला, तेज बुखार, डायरिया और यहां तक कि रेबीज जैसी जानलेवा बीमारियां फैल सकती हैं। इस घटना के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई यूजर्स का कहना है कि दिखावे और रोमांच के चक्कर में लोग अपनी और दूसरों की जान जोखिम में डाल रहे हैं। बीजिंग की यह घटना उन सभी लोगों के लिए एक सख्त चेतावनी है, जो खतरनाक जानवरों को पालतू बनाकर शौक पूरा करना चाहते हैं, क्योंकि एक गलत फैसला जिंदगी भर का पछतावा बन सकता है। सुदामा/ईएमएस 13 जनवरी 2026