अंतर्राष्ट्रीय
13-Jan-2026
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वाशिंगटन,(ईएमएस)। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच फिर तकनीक को “डिजिटल हथियार” के रूप में इस्तेमाल करने की चर्चा है। ईरान में आयतुल्ला अली खामेनेई की सरकार के खिलाफ चल रहे व्यापक विरोध प्रदर्शनों के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा संकेत दिया है कि वे इंटरनेट बहाली के लिए टेस्ला और स्पेसएक्स प्रमुख एलन मस्क से बातचीत कर सकते हैं। इस कदम को कई विश्लेषक “वेनेजुएला मॉडल” से जोड़कर देख रहे हैं, जहां राजनीतिक संकट के दौरान स्टारलिंक के जरिए इंटरनेट सेवा उपलब्ध हुई थी। ईरान में 28 दिसंबर से शुरू हुए विरोध प्रदर्शन पहले बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ थे, लेकिन धीरे-धीरे वे सरकार और 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से सत्ता में बैठे धार्मिक नेतृत्व के खिलाफ आंदोलन में बदल गए। हालात बिगड़ते देख ईरानी सरकार ने देश के बड़े हिस्से में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दीं, जिससे आम नागरिकों का बाहरी दुनिया से संपर्क करीब पूरी तरह टूट गया। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, इन प्रदर्शनों को दबाने के लिए की गई कार्रवाई में सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है, हालांकि आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस लेकर ट्रंप ने कहा कि ईरान अमेरिका से बातचीत करना चाहता है और वह इस पर विचार कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि ईरान में इंटरनेट बहाली को लेकर वे मस्क से चर्चा कर सकते हैं। ट्रंप के मुताबिक, मस्क की कंपनी स्पेसएक्स इस तरह के तकनीकी समाधान देने में सक्षम है और स्टारलिंक जैसी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा इंटरनेट ब्लैकआउट को तोड़ने का जरिया बन सकती है। स्टारलिंक पहले भी ईरान के संदर्भ में चर्चा में रहा है। वर्ष 2022 में महसा अमीनी की मौत के बाद हुए प्रदर्शनों के दौरान सीमित स्तर पर सैटेलाइट इंटरनेट के जरिए कनेक्टिविटी बहाल करने की कोशिशें की गई थीं। हालांकि ईरानी सरकार ने तब और अब दोनों ही मौकों पर सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं को जाम करने और उनके इस्तेमाल को रोकने के प्रयास किए हैं। वेनेजुएला में इस साल की शुरुआत में स्टारलिंक द्वारा मुफ्त ब्रॉडबैंड सेवा उपलब्ध कराए जाने को ट्रंप प्रशासन के लिए एक उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है। उस समय राजनीतिक अस्थिरता और इंटरनेट अवरोध के बीच इस सेवा ने लोगों को वैश्विक संचार से जोड़े रखा था। विशेषज्ञों का मानना है कि स्टारलिंक जैसी सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं स्थानीय नेटवर्क पर निर्भर नहीं होतीं, इसलिए इन्हें पूरी तरह नियंत्रित या बंद करना मुश्किल होता है। इसी कारण इन्हें सेंसरशिप और इंटरनेट कटौती को बायपास करने वाला एक प्रभावी “डिजिटल हथियार” माना जा रहा है, जो भविष्य में वैश्विक राजनीति और आंदोलनों में अहम भूमिका निभा सकता है। आशीष/ईएमएस 13 जनवरी 2026