राष्ट्रीय
13-Jan-2026
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कोलकाता,(ईएमएस)। साल 2001 के बाद यह पहला मौका है जब पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के संदिग्ध मामले सामने आए हैं। जानलेवा निपाह वायरस के 2 संदिग्ध मामले सामने आने के बाद केंद्र सरकार अलर्ट हो गई हैं। संदिग्ध मामले सामने आने के बाद केंद्र ने एक मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम को बंगाल भेजा है। इससे पहले स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक सूत्रों ने सोमवार को बताया कि एम्स कल्याणी में बीते 11 जनवरी को वायरस के संक्रमण की पुष्टि हुई। मुख्य सचिव ने आश्वासन दिया कि यह सुनिश्चित करने के लिए कड़ी सतर्कता बरती जा रही है कि उनके संपर्क में आने से कोई और व्यक्ति संक्रमित ना हो। फिलहाल उत्तर 24 परगना, पूर्व बर्धमान और नदिया जिलों में कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग और जांच की जा रही है। इसमें उन स्थानों की पहचान भी शामिल है, जहां दोनों नर्सें कार्यरत थीं और जिन इलाकों में उन्होंने यात्रा की थी। राज्य सरकार ने आपात स्थिति के लिए तीन हेल्पलाइन नंबर भी सक्रिय किए हैं। केंद्र द्वारा भेजी गई नेशनल जॉइंट आउटब्रेक रिस्पॉन्स टीम में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी), नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी और पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत वन्यजीव प्रभाग के विशेषज्ञ शामिल हैं। वायरस की उच्च मृत्यु दर और जूनोटिक प्रकृति को देखते हुए विशेष संक्रमण रोकथाम और नियंत्रण प्रोटोकॉल भी अपनाए गए हैं। वहीं राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि दोनों संदिग्ध अस्पताल में नर्स हैं और दोनों उसी अस्पताल में इलाजरत हैं, जहां वे कार्यरत थीं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार स्थिति पर कड़ी नजर बनाए हुए है और यह पता लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं कि दोनों नर्सें निपाह वायरस से कैसे संक्रमित हुईं। इसके साथ ही हाल के दिनों में उनके संपर्क में आए सभी लोगों की पहचान और जांच की जा रही है। जानकारी मिली है कि दोनों नर्सें कुछ दिन पहले बर्धमान गई थीं और उन इलाकों में भी जांच की जा रही है। कितना खतरनाक है वायरस? निपाह वायरस (एनआईवी) मुख्य रूप से फल खाने वाले चमगादड़ों, जिन्हें फ्लाइंग फॉक्स भी कहा जाता है, के जरिए फैलता है। यह सूअरों और कुछ अन्य घरेलू जानवरों से भी मनुष्यों में फैल सकता है। इसके अलावा मानव से मानव में संक्रमण के मामले भी दर्ज किए गए हैं। यह संक्रमण गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है, जिसमें एन्सेफलाइटिस (मस्तिष्क की सूजन) शामिल है। इसकी मृत्यु दर 40 से 75 प्रतिशत तक बताई जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार फिलहाल निपाह वायरस के लिए कोई विशेष दवा या टीका उपलब्ध नहीं है।वायरस को फैलने से रोकने के लिए सख्त संक्रमण नियंत्रण उपाय, सुरक्षात्मक उपकरणों का उपयोग, सतहों का कीटाणुशोधन और बीमार जानवरों या प्रकोप वाले क्षेत्रों से दूर रहना बेहद आवश्यक है। हालांकि शुरुआती लक्षण सामान्य होने के कारण समय पर पहचान चुनौतीपूर्ण होती है, लेकिन तंत्रिका संबंधी लक्षण सामने आते ही तुरंत इलाज लेना अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। वीरेंद्र/ईएमएस/13जनवरी2026