देहरादून,(ईएमएस)। अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग और वीआईपी की भूमिका को लेकर जारी विवाद के बीच उत्तराखंड सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सोमवार को सरकार ने इस संवेदनशील मामले की सीबीआई जांच के लिए औपचारिक पत्र भेज दिया है। वहीं पूर्व विधायक भी नार्को टेस्ट कराने के लिए सहमत हो गए हैं। मुख्यमंत्री के सचिव शैलेश बगौली ने इस कदम की पुष्टि करते हुए बताया कि अंकिता के माता-पिता की भावनाओं और उनकी मांग का सम्मान करते हुए, विशेष रूप से उस वीआईपी की भूमिका की जांच का अनुरोध किया गया है जिसका नाम बार-बार इस प्रकरण में सामने आता रहा है। सरकार द्वारा भेजे गए इस पत्र में हत्याकांड का पूरा ब्योरा दिया गया है और केंद्रीय जांच एजेंसी से गहन पड़ताल का आग्रह किया गया है। उल्लेखनीय है कि अंकिता के पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी और माता सोनी देवी ने हाल ही में देहरादून में मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने वीआईपी की संलिप्तता की जांच सीबीआई से और सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में कराने की गुहार लगाई थी। कानूनी पहलुओं पर विस्तृत विचार-विमर्श के बाद, मुख्यमंत्री ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का निर्णय लिया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया कि सरकार अंकिता को न्याय दिलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और जांच की आंच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। वहीं दूसरी ओर, इस मामले से जुड़े एक कथित ऑडियो-वीडियो के वायरल होने के बाद कानूनी शिकंजा कसता नजर आ रहा है। इस प्रकरण में आरोपों के घेरे में आए पूर्व विधायक सुरेश राठौर सोमवार देर रात नेहरू कॉलोनी थाने पहुंचे, जहां पुलिस अधिकारियों ने उनसे लंबी पूछताछ की। पुलिस का मुख्य ध्यान उस ऑडियो क्लिप पर रहा जिसमें कथित तौर पर पूर्व विधायक की आवाज होने का दावा किया जा रहा है। पूछताछ के दौरान राठौर ने स्वीकार किया कि आवाज उनकी हो सकती है, लेकिन उन्होंने तर्क दिया कि उस समय वे पूरी तरह होश में नहीं थे। उन्होंने स्वास्थ्य कारणों और नींद की दवाओं के सेवन का हवाला देते हुए कहा कि यह बातचीत उनकी सहमति के बिना रिकॉर्ड की गई थी, इसलिए इसे प्रमाणित नहीं माना जाना चाहिए। पुलिस प्रशासन पूर्व विधायक के जवाबों से पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आया, जिसके बाद जांच को वैज्ञानिक दिशा देने की कवायद शुरू की गई। पुलिस ने सुरेश राठौर के सामने वॉयस सैंपल देने और नार्को टेस्ट कराने का विकल्प रखा। पूर्व विधायक ने नार्को टेस्ट के लिए अपनी लिखित सहमति दे दी है। अब पुलिस फॉरेंसिक लैब के माध्यम से आवाज के मिलान और नार्को टेस्ट की प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाएगी। सरकार और पुलिस दोनों ही इस मामले में निष्पक्ष और वैज्ञानिक जांच का भरोसा दे रहे हैं, ताकि लंबे समय से चले आ रहे इस हत्याकांड के रहस्य से पर्दा उठ सके और असल दोषियों को कानून के कठघरे में खड़ा किया जा सके। वीरेंद्र/ईएमएस/13जनवरी2026