राष्ट्रीय
13-Jan-2026
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नई दिल्ली,(ईएमएस)। सोशल मीडिया पर एक और तस्वीर तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें एक कॉपी के पन्ने पर लिखे नोट्स के जरिए लोकतंत्र, सरकार और असहमति को लेकर तीखे सवाल उठाए गए हैं। तस्वीर के शीर्ष पर “अंधभक्त?” लिखा है, जो मौजूदा राजनीतिक विमर्श में अक्सर इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द बन चुका है। इस पोस्ट में यह समझाने की कोशिश की गई है कि किस तरह सत्ता, पार्टी और नेता को एक ही मान लिया जाता है और सवाल पूछने वालों को गलत ठहराया जाता है। वायरल नोट्स में लिखा है कि पार्टी को ही देश मान लिया जाता है और नेता को “भगवान” की तरह देखा जाने लगता है। इसके बाद सवाल उठाया गया है कि क्या मौजूदा सरकार से सवाल पूछना गलत है। नोट्स में बेरोजगारी, शिक्षा, महंगाई, स्वास्थ्य और विकास जैसे मुद्दों का जिक्र करते हुए कहा गया है कि इन्हें “झूठी खबर” बताकर खारिज कर दिया जाता है। साथ ही, यह भी लिखा गया है कि तथ्यों के बजाय व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी से आई जानकारी को 100 प्रतिशत सच मान लिया जाता है। तस्वीर में यह आरोप भी लगाया गया है कि सरकार की नीतियों का विरोध करने वालों को “एंटी-नेशनल”, “पाकिस्तान समर्थक” या “आतंकवादी” जैसे लेबल दे दिए जाते हैं। नोट्स के अनुसार, असहमति को देशद्रोह से जोड़ना लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी है। इसमें 2014 के बाद की राजनीतिक स्थिति का संदर्भ देते हुए हिंदू धर्म और हिंदू राष्ट्र जैसे मुद्दों को भी बहस के केंद्र में दिखाया गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह वायरल सामग्री मौजूदा दौर में बढ़ते ध्रुवीकरण और असहमति के प्रति असहिष्णुता को दर्शाती है। वहीं, सत्तारूढ़ दल के समर्थक इसे एकतरफा सोच और सरकार की छवि खराब करने की कोशिश बता रहे हैं। कुल मिलाकर, यह वायरल तस्वीर एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि लोकतंत्र में सवाल पूछना नागरिक का अधिकार है या उसे अंधभक्ति और राष्ट्रवाद के तराजू पर तौला जाएगा। सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर बहस लगातार तेज होती जा रही है। ज्ञानू 13 जनवरी 26