क्षेत्रीय
13-Jan-2026
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बलरामपुर(ईएमएस)। जिले के रघुनाथनगर वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम पण्डरी से वन विभाग की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा करने वाला मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने प्रभारी रेंजर शिवनाथ ठाकुर पर रिश्वत मांगने, धमकी देने, मारपीट कराने और बाद में फर्जी FIR दर्ज कराने जैसे बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। मामले को लेकर ग्रामीणों ने सरगुजा रेंज के IG (वन) और मुख्य वन संरक्षक को लिखित शिकायत सौंपते हुए उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है। गौरतलब है कि हाल ही में रघुनाथनगर वन विभाग ने 43 लोगों को अतिक्रमण हटाने का नोटिस जारी किया था, जिसमें तीन दिन के भीतर वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे। हैरानी की बात यह है कि तीन दिन बीतने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, लेकिन इसी बीच प्रभारी रेंजर पर लगे गंभीर आरोपों ने पूरे प्रकरण को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि वे ग्राम पंचायत हरिगवां के निवासी हैं और ग्राम पंचायत पण्डरी क्षेत्र में सड़क किनारे ठेला लगाकर चना और अंडा बेचकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। आरोप है कि 7 जनवरी को प्रभारी रेंजर शिवनाथ ठाकुर उनके ठेले पर पहुंचे और कहा कि यदि यहां ठेला लगाना है तो हर महीने 5 हजार रुपये देने होंगे। जब ग्रामीणों ने अपनी कमजोर आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए रकम देने में असमर्थता जताई, तो रेंजर नाराज होकर वहां से चले गए। ग्रामीणों के अनुसार, उसी दिन दोपहर करीब 12 बजे प्रभारी रेंजर पांच वन कर्मचारियों के साथ दोबारा मौके पर पहुंचे और अतिक्रमण का हवाला देते हुए ठेला हटाने का आदेश दिया। ग्रामीणों ने तत्काल ठेला हटाने की बात कही, साथ ही यह भी मांग की कि सड़क किनारे मौजूद अन्य स्थायी कब्जों पर भी समान कार्रवाई की जाए। इसी बात पर आरोप है कि रेंजर आपा खो बैठे और गाली-गलौज करते हुए ग्रामीणों को जबरन वाहन में बैठाकर जेल भेजने की धमकी देने लगे। आरोपों के मुताबिक, इस दौरान वन विभाग के कर्मचारियों ने ग्रामीणों के वृद्ध पिता के साथ मारपीट की और उन्हें जबरन वाहन में बैठाने का प्रयास किया। घटना के वक्त बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जमा हो गए, जिन्होंने बीच-बचाव कर स्थिति को संभाला। इसके बाद ग्रामीणों ने अपना ठेला हटा लिया और कुछ देर बाद वन विभाग की टीम वहां से चली गई। मामले ने तब और तूल पकड़ लिया, जब ग्रामीणों को अगले दिन उनके खिलाफ थाने में फर्जी और निराधार FIR दर्ज होने की जानकारी मिली। आरोप है कि यह रिपोर्ट वन कर्मचारी पीयूष पटेल द्वारा दर्ज कराई गई, जिसमें दावा किया गया कि ग्रामीणों ने उसके साथ मारपीट की और वर्दी फाड़ दी। ग्रामीणों का कहना है कि पीयूष पटेल घटनास्थल पर वर्दी में मौजूद ही नहीं थे, ऐसे में वर्दी फाड़ने का आरोप पूरी तरह झूठा और मनगढ़ंत है। घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने सरगुजा रेंज के IG (वन) और मुख्य वन संरक्षक को शिकायत सौंपते हुए प्रभारी रेंजर शिवनाथ ठाकुर सहित संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। एक ओर जहां वन विभाग 43 लोगों को अतिक्रमण हटाने का नोटिस जारी कर सख्ती दिखा रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रभारी रेंजर पर रिश्वतखोरी, गरीब ठेला व्यवसायियों को धमकाने, मारपीट और फर्जी मुकदमे में फंसाने जैसे आरोप विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि उच्च अधिकारी इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं—क्या निष्पक्ष जांच होगी और क्या ग्राम पण्डरी के ग्रामीणों को वास्तव में न्याय मिल पाएगा या नहीं। सत्यप्रकाश(ईएमएस)13 जनवरी 2026