नई दिल्ली,(ईएमएस)। दिल्ली-एनसीआर में इन दिनों कड़ाके की ठंड नहीं, बल्कि आफत बरस रही है। ठंड का आलम यह है कि दिल्ली से सटा गुरुग्राम इन दिनों शिमला और मनाली को भी मात दे रहा है। सोमवार सुबह गुरुग्राम में न्यूनतम तापमान ऐतिहासिक 0.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिसने पिछले पांच दशकों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। यह तापमान गुरुग्राम के इतिहास में 22 जनवरी, 1977 के बाद सबसे कम दर्ज किया गया है। आश्चर्य की बात यह है कि जीरो डिग्री के करीब पहुंच चुका गुरुग्राम देश के कई प्रमुख हिल स्टेशनों से भी अधिक ठंडा रहा। सर्दी के इस ग्राफ को देखकर लोग हैरान हैं क्योंकि पहाड़ों की रानी कहा जाने वाला शिमला भी गुरुग्राम की तुलना में अधिक गर्म महसूस किया जा रहा है। राजधानी दिल्ली भी इस मामले में बहुत पीछे नहीं है। दिल्ली में न्यूनतम तापमान 3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है, जो इस सीजन की अब तक की सबसे सर्द सुबह रही। गुरुग्राम और दिल्ली के बीच केवल कुछ ही डिग्री का अंतर बचा है, जिससे पूरा एनसीआर क्षेत्र बर्फ जैसी ठंड की चपेट में है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, गुरुग्राम के इतिहास में अब तक केवल तीन बार ही इससे कम तापमान दर्ज हुआ है, जिनमें 1966 में शून्य से नीचे 0.4 डिग्री और 1970 में 0 डिग्री सेल्सियस शामिल है। हैरानी की बात यह है कि सोमवार को जब गुरुग्राम 0.6 डिग्री पर जम रहा था, तब हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा और पालमपुर में तापमान 3 डिग्री, जम्मू में 3.4 डिग्री और उत्तराखंड के मुक्तेश्वर व टिहरी में 4.1 डिग्री सेल्सियस था। यहां तक कि मसूरी में 7.7 डिग्री और शिमला में 8.8 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। यानी मैदानी इलाके पहाड़ों की तुलना में कहीं ज्यादा ठंडे रहे। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि पहाड़ों पर सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण बादल छाए हुए हैं, जिससे वहां की गर्मी रात में बाहर नहीं निकल पा रही है और न्यूनतम तापमान ऊपर बना हुआ है। इसके विपरीत, मैदानी इलाकों में आसमान बिल्कुल साफ है और उत्तर-पश्चिमी ठंडी हवाओं के कारण रेडिएटिव कूलिंग हो रही है, जिससे तापमान में भारी गिरावट आई है। इस भीषण ठंड के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। गुरुग्राम और आसपास के इलाकों में सुबह-सुबह फसलों, घास के मैदानों और गाड़ियों के शीशों पर पाले की सफेद परत जमी हुई दिखाई दी। मौसम विभाग के अनुसार हरियाणा, दिल्ली और आसपास के राज्यों में शीतलहर से लेकर गंभीर शीतलहर की स्थिति बनी रहेगी। साथ ही घना कोहरा और जमीन पर पाला जमने की भी चेतावनी दी गई है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले तीन दिनों तक उत्तर-पश्चिम भारत में तापमान में कोई खास सुधार नहीं होगा, हालांकि इसके बाद धीरे-धीरे 2 से 4 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हो सकती है। इस कड़ाके की सर्दी की एक मुख्य वजह बारिश की कमी भी बताई जा रही है। दिसंबर और जनवरी के शुरुआती दिनों में उत्तर-पश्चिम भारत में सामान्य से 84 प्रतिशत कम बारिश हुई है, जिससे पहाड़ों पर बर्फबारी भी कम हुई है। जब तक यह सूखा पैटर्न नहीं बदलता और कोई मजबूत पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय नहीं होता, तब तक मैदानी इलाकों में कड़ाके की ठंड और कोहरे का यह दौर जारी रहने की आशंका है। फिलहाल, 15 जनवरी के आसपास एक नए पश्चिमी विक्षोभ के आने की संभावना है, जिससे बादल छाने और ठंड से थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। वीरेंद्र/ईएमएस/13जनवरी2026