-पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले ईडी की बढ़ती सक्रियता को लेकर उठे सवाल नई दिल्ली,(ईएमएस)। पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले ईडी की बढ़ती सक्रियता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। ताजा मामला कोलकाता में आई-पीएसी से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी का है, जिसमें सीएम ममता बनर्जी और ईडी आमने-सामने आ गए हैं। बंगाल में इस साल विधानसभा चुनाव होना हैं। इससे पहले 4 साल में 3 राज्यों झारखंड, दिल्ली, महाराष्ट्र में ऐसा हो चुका है, जब ईडी ने पुराने मामलों में चुनाव से कुछ समय पहले बड़ी कार्रवाई की है। इस साल बंगाल समेत तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव होना हैं। इसके साथ इन राज्यों में ईडी ने पुराने मामलों की फाइलें खोलना शुरू कर दिया है। तमिलनाडु में शराब, रियल एस्टेट और शेल कंपनियों से जुड़े मामले सत्ताधारी डीएमके के लिए परेशानी बन गए हैं। वहीं असम में बीजेपी की सरकार है। विपक्षी कांग्रेस और एआईयूडीएफ से जुड़े नेताओं पर कार्रवाई का डर चुनावी फंडिंग नेटवर्क पर असर डाल रहा है। केरल में सोना तस्करी और सहकारी बैंक मामलों से एलडीएफ सरकार घिरी हुई है। पुडुचेरी में कारोबारी और राजनीतिक गठजोड़ पर एजेंसी की नजर है। बता दें झारखंड में सीएम हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी के बाद दबाव बना था। दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी ने आप का ताना-बाना बिगाड़ दिया था। महाराष्ट्र में शिवसेना और एनसीपी से जुड़े मामलों के बीच दल टूटे और सरकारें गिरीं। कई बार चार्जशीट से पहले ही राजनीतिक समीकरण बदल गए। हालांकि इडी का कहना है कि उसका काम केवल कानून के तहत जांच करना है, चुनाव से कोई लेना-देना नहीं है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिम बंगाल में आई-पीएसी मामला 5 साल पुराना, लेकिन पहला छापा चुनाव से 2-3 महीने पहले मारा गया। ईडी ने कोयला तस्करी से जुड़े 2,742 करोड़ के मनी-लॉन्डरिंग मामले के तहत 8 जनवरी को इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (आई-पीएसी) के कार्यालय और निर्देशक प्रतीक जैन के घर छापेमारी की थी। सीबीआई ने इस मामले में 27 नवंबर 2020 को एफआईआर दर्ज की थी। ईडी ने 28 नवंबर 2020 को इसकी जांच शुरू की थी। यह मामला अब 5वें साल में है, लेकिन कार्रवाई ठीक उस वक्त सामने आई, जब बंगाल में मार्च-अप्रैल 2026 में चुनाव होने हैं। आई-पीएसी भारत की पॉलिटिकल कंसल्टेंसी कंपनी है, जो राजनीतिक दलों के लिए बड़े स्तर पर चुनावी अभियानों का काम करती है। आरोप है कि 20 करोड़ हवाला के जरिए आई-पीएसी तक ट्रांसफर हुए। ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें कहा गया है कि राज्य सरकार ने जांच में बाधा डाली और सबूत नष्ट किए। दिल्ली में 2022 के मामले में 2024 में सीएम अरेस्ट हुए, 2025 में चुनाव थे। 2022 में शराब नीति मनी-लॉन्ड्रिंग मामले में सीबीआई और ईडी जांच की शुरुआत हुई। फरवरी 2023 में इस मामले में मनीष सिसोदिया और मार्च 2024 में तत्कालीन सीएम अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी हुई। फरवरी 2025 में विधानसभा चुनाव हुए और बीजेपी सत्ता पर काबिज हो गई। वहीं झारखंड में अगस्त 2023 में ईडी ने भूमि और मनी-लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया। दिसंबर में पूछताछ हुई। जनवरी 2024 में ईडी ने सीएम हेमंत सोरेन को इस मामले में गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद उन्हें अपना सीएम पद छोड़ना पड़ा था। नवंबर 2024 में चुनाव हुए। हालांकि, हेमंत सोरेन की पार्टी जीती और वे फिर सीएम बन गए। महाराष्ट्र में 2021 के मामले में 3 साल बाद चुनाव से 6 दिन पहले छापेमारी की। 14 नवंबर 2024 को ईडी ने महाराष्ट्र और गुजरात में 23 स्थानों पर छापेमारी की और व्यापारी सिराज अहमद हारुन मेमन से जुड़े 125 करोड़ रुपए के मनी-लॉन्ड्रिंग और चुनावी फंडिंग ट्रेल को खंगाला। 20 नवंबर 2024 को चुनाव से छह दिन पहले इस मामले में विपक्षी दलों पर नोट और वोट जिहाद के आरोप लगे। इस चुनाव में बीजेपी ने जी हासिल की। सिराज/ईएमएस 13जनवरी26