बिलासपुर (ईएमएस)। बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर तथा कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, लोरमी-मुंगेली के संयुक्त तत्वावधान में युवाओं के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद की 163वीं जयंती को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में गरिमामय वातावरण में मनाया गया। भारत सरकार द्वारा वर्ष 1984 में 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस घोषित किया गया था, जिसे वर्ष 1985 से प्रतिवर्ष मनाया जा रहा है। इस वर्ष राष्ट्रीय युवा दिवस की थीम उठो, जागो और अपनी शक्ति को पहचानो रखी गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि स्वामी सेवाव्रतानंद महाराज, सचिव, रामकृष्ण मिशन, बिलासपुर ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि आज का दिन पुण्य का दिन है, क्योंकि इसी दिन स्वामी विवेकानंद का जन्म हुआ था। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद के विचार युवाओं को संघर्ष करने की शक्ति देते हैं। स्वामी जी स्वयं में भारत थे और सदैव राष्ट्र के कल्याण की बात करते थे। उन्होंने कहा कि युवा वही है, जिसमें उत्साह हो और कुछ नया करने का साहस हो। प्राचीन काल में भारत की संस्कृति अत्यंत समृद्ध थी, किंतु समय के साथ उसका पतन हुआ। भविष्य में भारत कैसा होगा, इसके लिए अतीत और वर्तमान दोनों का ज्ञान आवश्यक है। आज के युवा पश्चिमी संस्कृति के अंधानुकरण में अपनी जड़ों से दूर हो रहे हैं। भारत को जानना है तो स्वामी विवेकानंद को जानना होगा, तभी विकसित भारत की संकल्पना साकार हो सकेगी। स्वामी सेवाव्रतानंद महाराज ने कहा कि युवावस्था जीवन की सबसे महत्वपूर्ण अवस्था है। इस समय युवाओं को ऐसे वातावरण की आवश्यकता होती है, जो उनके मानसिक, शारीरिक और नैतिक विकास के साथ-साथ जीवन में उन्नति का मार्ग प्रशस्त करे। उन्होंने युवाओं से स्वामी विवेकानंद के जीवन चरित्र का अध्ययन कर उसे अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया। अपने स्वागत उद्बोधन में डॉ. एन. के. चौरे, अधिष्ठाता, कृषि महाविद्यालय, बिलासपुर ने कहा कि स्वामी विवेकानंद एक महान दार्शनिक होने के साथ उत्कृष्ट शिक्षाविद् भी थे। उनके विचारों को आत्मसात करने के लिए उनके बताए कर्मप्रधान मार्ग पर चलना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि युवा किसी भी राष्ट्र की रीढ़ होते हैं और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की क्षमता रखते हैं। युवा सशक्तिकरण से ही राष्ट्र निर्माण संभव है। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉ. एस. एल. स्वामी, अधिष्ठाता, कृषि महाविद्यालय, लोरमी-मुंगेली ने अपने उद्बोधन में कहा कि स्वामी विवेकानंद का संदेश आत्मबल, आत्मविश्वास और अनुशासन पर आधारित है, जो आज के युवाओं के लिए अत्यंत प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना होना चाहिए। युवाओं को स्वामी विवेकानंद के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाकर समाज और देश के विकास में योगदान देना चाहिए। राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी अजीत विलियम्स ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए कहा कि युवा सामाजिक, राजनीतिक और आध्यात्मिक परिवर्तन लाने में सक्षम हैं। राष्ट्रीय युवा दिवस युवाओं को आत्मविश्वास, मजबूत चरित्र, अनुशासन और राष्ट्र सेवा की प्रेरणा देता है। इस वर्ष राष्ट्रीय युवा दिवस का विषय उठो, जागो और अपनी शक्ति को पहचानो केवल एक प्रेरक वाक्य नहीं, बल्कि जीवन दर्शन है। स्वामी विवेकानंद जी का यह संदेश व्यक्ति, समाज और राष्ट्र-तीनों के नव- निर्माण का मूल मंत्र है। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा एवं स्वामी विवेकानंद के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। राष्ट्रीय युवा दिवस की 41वीं वर्षगांठ के अवसर पर छात्र-छात्राओं के लिए स्वामी विवेकानंद का चरित्र-निर्माण दर्शन नशा-मुक्ति का सबसे मजबूत आधार है विषय पर भाषण प्रतियोगिता तथा विकसित भारत लक्ष्य 2047 विषय पर रंगोली एवं चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित की गई। भाषण प्रतियोगिता में छात्र राज प्रताप सिंह, देवराज एवं तन्य बानी ने प्रभावशाली प्रस्तुति दी। विजेता प्रतिभागियों को मुख्य अतिथि द्वारा पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन वैज्ञानिक/कार्यक्रम अधिकारी राष्ट्रीय सेवा योजना अजीत विलियम्स द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अंत में स्वदेशी संकल्प दौड़ का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। मनोज राज/योगेश विश्वकर्मा 13 जनवरी 2026