राज्य
13-Jan-2026
...


- प्रभारी पशु वध अधिकारी निलंबित, राजनीति गरमाई - भोपाल को मांस की मंडी नहीं बनने दिया जाएगा: किशन सूर्यवंशी - महापौर और पूरी एमआईसी को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए: प्रवीण सक्सेना भोपाल (ईएमएस)। राजधानी भोपाल में गोमांस पकड़े जाने के मामले ने मंगलवार को नगर निगम परिषद की बैठक को पूरी तरह हिला कर रख दिया। आईएसबीटी स्थित सभागार में आयोजित परिषद की बैठक में गो तस्करी का मुद्दा छाया रहा। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई, वहीं भाजपा के एक पार्षद भावुक होकर फूट-फूटकर रो पड़े और नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की पेशकश तक कर दी। इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी बड़ी कार्रवाई सामने आई है, जिसमें प्रभारी पशु वध गृह अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है। वहीं कांग्रेस ने इस मामले को लेकर महापौर और पूरी एमआईसी से इस्तीफे की मांग कर दी है। बैठक की शुरुआत से ही कांग्रेस पार्षद दल ने गोमांस परिवहन के मामले को लेकर हंगामा शुरू कर दिया। कांग्रेस पार्षदों का आरोप था कि राजधानी में खुलेआम गो तस्करी हो रही है, लेकिन नगर निगम और पुलिस प्रशासन आंख मूंदे बैठे हैं। इसी दौरान भाजपा पार्षद देवेंद्र भार्गव ने भी सदन में अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि भोपाल जैसे शहर में नगर निगम और पुलिस प्रशासन कुछ नहीं कर पा रहे हैं और गौ तस्करों को हिंदू संगठनों के लोग पकड़ रहे हैं। यह स्थिति हम सभी के लिए शर्मनाक है। इतना कहते-कहते भाजपा पार्षद देवेंद्र भार्गव भावुक हो गए। उनकी आंखों से आंसू बहने लगे और वे फूट-फूटकर रो पड़े। उन्होंने कहा, “हम बचपन से गौ माता की जय कहते आ रहे हैं। लेकिन आज मेरे पार्षद रहते हुए भोपाल में गौ माता की हत्या हो रही है, गोमांस पकड़ा जा रहा है। इसके लिए मैं नैतिक तौर पर खुद को जिम्मेदार मानता हूं और इस्तीफे की पेशकश करता हूं।” सदन में यह दृश्य देखकर कुछ देर के लिए माहौल बिल्कुल शांत हो गया। सत्ता पक्ष के कई पार्षद और अधिकारी भी असहज नजर आए। इस बीच प्रशासनिक स्तर पर बड़ी कार्रवाई सामने आई। भोपाल संभाग आयुक्त संजीव सिंह ने कर्तव्य में लापरवाही बरतने के आरोप में प्रभारी पशु वध गृह डॉ. बेनी प्रसाद गौर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। यह कार्रवाई जहांगीराबाद थाने में दर्ज गोमांस के संदिग्ध परिवहन मामले (एफआईआर क्रमांक 0007/2026) के बाद की गई। निलंबन आदेश में कहा गया है कि डॉ. गौर पर सिविल सेवा आचरण नियमों के उल्लंघन का आरोप है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय संयुक्त संचालक, पशु चिकित्सा सेवाएं नियत किया गया है। उल्लेखनीय है कि यह कार्रवाई नगर निगम परिषद की बैठक स्थगित होने के तुरंत बाद की गई, जिससे यह संदेश गया कि सरकार और प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं। नगर निगम परिषद की बैठक में अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने भी सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि गो तस्करी में लिप्त किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा। सूर्यवंशी ने नगर निगम कमिश्नर पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि जब हिंदू संगठनों ने गो तस्करों को पकड़ लिया, उसके बाद कार्रवाई शुरू हुई, लेकिन नगर निगम की भूमिका सवालों के घेरे में है। उन्होंने निर्देश दिए कि स्लॉटर हाउस में काम करने वाले नगर निगम के सभी कर्मचारियों की भूमिका की जांच की जाए और जो भी अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई की जाए। नगर निगम अध्यक्ष ने सदन से आदेश देते हुए कहा कि इस पूरे मामले की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित की जाएगी, जो शासन स्तर की होगी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि भोपाल को मांस की मंडी नहीं बनने दिया जाएगा। स्लॉटर हाउस को बंद किया जाएगा और जो भी कंपनी इसमें काम कर रही है, उसे स्थायी रूप से ब्लैकलिस्ट किया जाएगा, ताकि वह भविष्य में कोई भी टेंडर न ले सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में चाहे कोई कितना ही बड़ा व्यक्ति क्यों न हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा। इधर इस पूरे घटनाक्रम के बाद नगर निगम की राजनीति में भी उबाल आ गया है। कांग्रेस जिला अध्यक्ष और वरिष्ठ पार्षद प्रवीण सक्सेना ने सत्ताधारी भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने मांग की कि महापौर और पूरी मेयर-इन-काउंसिल (एमआईसी) को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए। सक्सेना का आरोप है कि नगर निगम प्रशासन शहर की बुनियादी समस्याओं को सुलझाने में पूरी तरह विफल रहा है और गोमांस जैसा गंभीर मामला इसका ताजा उदाहरण है। उन्होंने कहा कि जब राजधानी में इस तरह की घटनाएं हो रही हैं, तो सत्ताधारी दल को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ देना चाहिए। कांग्रेस के इस हमले के बाद नगर निगम की राजनीति में भूचाल आ गया है। भाजपा जहां इस मामले में सख्त कार्रवाई का दावा कर रही है, वहीं विपक्ष इसे प्रशासनिक विफलता और सत्ता की नाकामी बता रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है।