- 9 वर्ष बाद भी नहीं लगे बायो-फिल्ट्रेशन प्लांट सारंगपुर (ईएमएस)। नगर की जीवन दायिनी कालीसिंध नदी को प्रदूषण से मुक्त रखने के लिए वर्ष 2017 में दिए गए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के स्पष्ट निर्देश आज भी धरातल पर लागू नहीं हो सके हैं। नगर का सीवेज नदी में मिलने से रोकने के लिए जिन चार स्थानों पर बायो-फिल्ट्रेशन प्लांट लगाए जाने थे, वे 9 वर्ष बीतने के बावजूद आज तक स्थापित नहीं हो पाए हैं। परिणामस्वरूप कालीसिंध नदी में निरंतर गंदा पानी प्रवाहित हो रहा है और पर्यावरणीय संकट गहराता जा रहा है। 2017 में दायर हुई थी जनहित याचिका वर्ष 2017 में स्थानीय निवासी राकेश कुमार पांडे की ओर से उनके अधिवक्ता मनीष कुमार विजयवर्गीय द्वारा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल, सेंट्रल जोनल बेंच, भोपाल के समक्ष जनहित याचिका दायर की गई थी। सुनवाई के दौरान ट्रिब्यूनल ने नगर पालिका को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि किसी भी स्थिति में नगर का सीवेज कालीसिंध नदी में न जाने पाए। कम्प्लायंस रिपोर्ट में चार प्लांट लगाने का दावा मामले की सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल को बताया गया था कि नगर पालिका द्वारा अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी गई है। रिपोर्ट में दावा किया गया कि जिन नालों से सीवेज सीधे कालीसिंध नदी में जा रहा था, वहां चार स्थानों पर बायो-फिल्ट्रेशन प्लांट स्थापित कर दिए गए हैं।नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल को यह भी बताया गया था कि इन प्लांट्स की कार्यक्षमता और उनसे निकलने वाले पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा की जाएगी। जल-गुणवत्ता मानकों में कमी पाए जाने पर नगर पालिका को सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए जाएंगे। अन्य नालों पर भी ट्रीटमेंट व्यवस्था के निर्देश ट्रिब्यूनल ने यह भी स्पष्ट किया था कि यदि सारंगपुर क्षेत्र में ऐसे अन्य स्थान सामने आते हैं, जहां से सीवेज नालों के माध्यम से नदी में मिल रहा है, तो वहां भी इसी प्रकार की ट्रीटमेंट व्यवस्था लागू की जाए। साथ ही, बायो-फिल्ट्रेशन प्लांट में जमा होने वाले ठोस कचरे को नियमित रूप से हटाने के लिए स्थायी स्टाफ की व्यवस्था तथा फिल्टरिंग के दौरान निकलने वाले कीचड़ को वैज्ञानिक तरीके से ट्रीट कर खाद के रूप में उपयोग में लाने के निर्देश भी दिए गए थे। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने प्रतिवादियों को प्लांट की कार्यप्रणाली, ठोस कचरे की निकासी और कीचड़ से खाद निर्माण की प्रक्रिया की वीडियोग्राफी तथा चारों नालों से ट्रीट किए गए पानी की जल-विश्लेषण रिपोर्ट ट्रिब्यूनल के समक्ष पेश करने के आदेश दिए थे। आरओ गुना को भी दिए गए थे सहयोग के निर्देश इसके अतिरिक्त, ट्रिब्यूनल ने क्षेत्रीय कार्यालय गुना (आरओ गुना) को जिसके अधिकार क्षेत्र में सारंगपुर आता है यह निर्देश दिए थे कि वह कालीसिंध नदी में गिरने वाले नालों पर बायो-फिल्ट्रेशन यूनिट लगाने के कार्य में नगर पालिका को आवश्यक तकनीकी और प्रशासनिक सहयोग प्रदान करे। पीसीबी के अधिवक्ता को आदेश की प्रति आरओ गुना को भेजने के निर्देश भी दिए गए थे। हकीकत: चारों बायो-फिल्ट्रेशन प्लांट आज तक नहीं लगे पीटीशन दायर करने वाले हाईकोर्ट अधिवक्ता मनीष विजयवर्गीय ने बताया कि ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा नगर पालिका परिषद को गंदे पानी को नदी में मिलने से तत्काल रोकने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। नपा के अधिवक्ता ने ट्रिब्यूनल को चार स्थानों पर बायो-फिल्ट्रेशन प्लांट लगाए जाने की जानकारी दी थी, जबकि वास्तविकता यह है कि ये चारों प्लांट आज तक नहीं लगाए जा सके हैं। बूचड़खाने और चमड़ा धोने का पानी भी नदी में नगर के बूचड़खाने और चमड़ा धोने से निकला गंदा पानी सीधे कालीसिंध नदी में मिल रहा है। इससे नदी का जल गंभीर रूप से प्रदूषित हो रहा है और संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है। वर्तमान में दूषित जल को पाइप लाइनों के माध्यम से नदी में छोड़ा जा रहा है, जो कभी भी बड़ी स्वास्थ्य आपदा का कारण बन सकता है। 37.3 करोड़ का सीवेज प्लांट प्रस्ताव ठंडे बस्ते में बताया जाता है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देश पर कालीसिंध नदी पर बनने वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का 37.3 करोड़ रुपये का प्राक्कलन (डीपीआर) तैयार कर नगरीय प्रशासन मंत्रालय को भेजा गया था। लेकिन शासन स्तर पर इस योजना पर आज तक अमल नहीं हो सका और यह प्रस्ताव ठंडे बस्ते में दबा रह गया। इस योजना के तहत शहर के समस्त गंदे नालों का पानी कालीसिंध नदी में मिलने से रोकने के लिए सीवेज प्लांट का निर्माण प्रस्तावित था। इसके लिए न्यायालय व तहसील कार्यालय के सामने दोनों ओर एबी रोड पर पक्के नालों का निर्माण, खारिया, अमनखेल, पुलिस थाने के सामने तथा बस स्टैंड, पालीवाल कॉम्प्लेक्स के पीछे पक्के नालों के निर्माण का प्रावधान किया गया था। इन नालों के निर्माण से नगर में जलभराव की समस्या भी समाप्त होनी थी और शहर को खुले नालों से फैलने वाली गंदगी से राहत मिलनी थी। किंतु बीते 9 वर्षों से यह प्राक्कलन कहां और किस स्तर पर उलझा है, यह किसी को स्पष्ट नहीं है। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का प्राक्कलन भेजा गया था, हमारे कार्यकाल के दौरान सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का प्राक्कलन भेजा गया था, लेकिन यह योजना फाइलों में ही अटकी रह गई और इसका कार्य शुरू नहीं हो सका। - रुपल सादानी, पूर्व नपाध्यक्ष सारंगपुर योजना स्वीकृत हो जाती है तो स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगी। नगर से निकलने वाले गंदे पानी को सीधे नदी में जाने से रोकने के उद्देश्य से नगर पालिका द्वारा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित करने की योजना पर काम किया जा रहा है। इसका प्राक्कलन हमारे द्वारा भी नगरीय प्रशासन विभाग को भेजा जा चुका है । स्वीकृति मिलने पर कार्य चालू किया जाएगा। अगर यह योजना स्वीकृत हो जाती है तो स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगी। पंकज पालीवाल , नपाध्यक्ष सारंगपुर नरेन्द्र जैन / 13 जनवरी 26