क्षेत्रीय
13-Jan-2026
...


खरगोन (ईएमएस) । सूर्य उपासना का पर्व मकर संक्रांति बुधवार को अत्यंत दुर्लभ और शुभ संयोग मनाया जाएगा। मकर संक्रांति पर नर्मदा तटों पर स्थान-दान के साथ ही मंदिरों में दर्शन-पूजन का विशेष महत्व है। कुंदा तट स्थित श्री नवग्रह मंदिर मकर संक्रांति पर विशेष आस्था का केंद्र होता है। यहां तड़के तीन बजे से श्रद्धालू कतार में लगने लगते है। मंदिर में दर्शन- पूजन के बाद सत्यनारायण भगवान कथा की परंपरा भी रही है। जिसको लेकर मंदिर परिसर में व्यापक स्तर पर तैयारियां की गई है। करीब 151 पंडितों की बैठक के लिए विशाल पांडाल लगाया गया है, जहां हजारों कथाएं सुनाकर श्रद्धालूओं को ईश्वर भक्ति से जोड़ा जाएगा। पंडित अरविंद डोंगरे के अनुसार 14 जनवरी को एकादशी और मकर संक्रांति एक ही दिन होने से इसका पुण्यफल कई गुणा बढ़ गया है। इससे पहले यह संयोग वर्ष 2003 में बना था। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग भी बन रहे हैं, जिससे दान.पुण्य, स्नान और पूजा का महत्व अक्षय फल देने वाला माना गया है।सूर्यदेव 14 जनवरी को दोपहर 3.07 बजे धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने को ही मकर संक्रांति कहा जाता है। मकर संक्रांति के साथ खरमास समाप्त हो जाएगा, लेकिन मांगलिक कार्य 30 जनवरी तक नहीं होंगे, क्योंकि इस अवधि में शुक्र अस्त रहेगा। शुक्र के उदय होने के बाद ही विवाह व अन्य शुभ संस्कार किए जा सकते हैं। इसलिए 31 जनवरी 2026 से ही शुभ कार्य शुरू होंगे। पतंग, तिल, रेवड़ी व गुड़ की बिक्री बढ़ी मकर संक्रांति के लिए बाजार में रंग-बिरंगी पतंग सहित गुड़, तिल की बिक्री भी तेज हो गई है। मकर संक्रांति पर तिल-गुड के लड्डू वितरण के साथ ही सेवन करने एवं पतंग उड़ाने की परंपरा रही है। वहीं गजक, रेवड़ी, की मांग भी बढ़ गई है। त्योहारों का असर बाजार में देखने को मिल रहा है। ईएमएस/नाजिम शेख/ 13 जनवरी 2025