अंतर्राष्ट्रीय
14-Jan-2026


ढाका,(ईएमएस)। बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन और शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद से अल्पसंख्यक समुदायों, विशेषकर हिंदुओं के खिलाफ हिंसा का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के कार्यकाल में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक हालिया मानवाधिकार रिपोर्ट के अनुसार, जून 2025 से जनवरी 2026 के बीच बांग्लादेश के विभिन्न हिस्सों में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों पर जुल्म की पराकाष्ठा देखी गई है। यहां मात्र 7 माह में 116 अल्पसंख्यकों को मौत के घाट उतार दिया गया है। मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स कांग्रेस फॉर बांग्लादेश माइनॉरिटीज द्वारा जनवरी 2026 के पहले सप्ताह में जारी की गई रिपोर्ट के आंकड़े डराने वाले हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 6 जून 2025 से 5 जनवरी 2026 के बीच बांग्लादेश में कम से कम 116 अल्पसंख्यक लोगों की हत्या कर दी गई है। मरने वालों में सबसे बड़ी संख्या हिंदू समुदाय के लोगों की है, जबकि कुछ बौद्ध और ईसाई समुदाय के लोग भी इस हिंसा का शिकार हुए हैं। यह हिंसा किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के सभी 8 डिवीजनों और लगभग 45 जिलों में फैली हुई है, जो अल्पसंख्यकों के खिलाफ एक सुनियोजित पैटर्न की ओर इशारा करती है। रिपोर्ट में बताया गया है कि इन हत्याओं का तरीका बेहद खौफनाक है। कुल 116 मामलों में से 12 मौतें सरेआम मॉब लिंचिंग यानी भीड़ द्वारा पीट-पीटकर की गई हत्याओं के कारण हुईं। इसके अलावा, कई लोगों को टारगेट किलिंग का शिकार बनाया गया, जबकि कुछ की मौत पुलिस हिरासत या संदिग्ध परिस्थितियों में हुई। चौंकाने वाली बात यह है कि कई हत्याएं ईशनिंदा जैसे झूठे आरोप लगाने के बाद भीड़ को उकसाकर की गईं। विशेष रूप से दिसंबर 2025 का महीना अल्पसंख्यकों के लिए सबसे काला साबित हुआ, जिसमें हत्या, लूटपाट और आगजनी की दर्जनों घटनाएं दर्ज की गईं। रिपोर्ट में वर्तमान प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर भी तीखे सवाल उठाए गए हैं। यह आरोप लगाया गया है कि पुलिस और स्थानीय प्रशासन की लापरवाही के कारण अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। अधिकांश मामलों में एफआईआर दर्ज करने में देरी की जाती है या जांच को इतना कमजोर रखा जाता है कि आरोपी आसानी से बच निकलते हैं। पीड़ित परिवारों को न्याय मांगने पर डराया-धमकाया जा रहा है, जिससे आम जनता का सिस्टम से भरोसा पूरी तरह टूट चुका है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि यह हिंसा तुरंत नहीं रुकी, तो इससे न केवल बांग्लादेश की सामाजिक एकता खंडित होगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर देश की छवि को भी गहरा धक्का लगेगा। वीरेंद्र/ईएमएस/14जनवरी2026