विदेशी समर्थन, इजराइल से नजदीकी, रजा की विश्वसनीयता को कर सकती है कमजोर तेहरान,(ईएमएस)। ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच शाह रजा पहलवी के बेटे रजा पहलवी एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। दशकों तक अमेरिका में निर्वासन का जीवन बिताने वाले रजा पहलवी की हालिया भूमिका ने न केवल ईरानी प्रवासी समुदाय बल्कि ईरान के अंदर भी कई लोगों को चौंका दिया है। “पहलवी वापस आएंगे” जैसे नारे विरोध प्रदर्शनों में सुनाई दे रहे हैं, जो यह संकेत दे रहे हैं कि राजशाही का नाम अब भी कुछ ईरानियों के लिए एक उम्मीद का प्रतीक बना हुआ है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एक इंटरव्यू में रजा पहलवी ने कहा कि जैसे ही हालात अनुमति देंगे, वे ईरान लौटने के लिए तैयार हैं। रजा पहलवी का बचपन शाही वैभव के बीच बीता, जहां उन्हें ईरान के अगले शाह के रूप में तैयार किया जा रहा था, लेकिन 1979 की इस्लामी क्रांति ने सब कुछ बदल दिया। उस समय 17 साल की रजा अमेरिका में सैन्य पायलट प्रशिक्षण के लिए गए हुए थे और क्रांति के बाद पूरा परिवार निर्वासन में चला गया। उनके पिता, अंतिम शाह मोहम्मद रजा पहलवी का 1980 में मिस्र में निधन हो गया। उनकी मां, पूर्व महारानी फराह पहलवी, आज भी हैं और 87 साल की उम्र पार कर चुकी हैं। रजा पहलवी लगातार यह स्पष्ट करते रहे हैं कि वे खुद को राजा के रूप में ताज पहनाने की आकांक्षा नहीं रखते। उनका दावा है कि वे ईरान को एक स्वतंत्र, लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था की ओर ले जाने के लिए संक्रमणकालीन नेतृत्व देने को तैयार हैं। हाल के वर्षों में उनकी लोकप्रियता बढ़ी है क्योंकि कई लोग उन्हें ऐसा राष्ट्रीय स्तर का विपक्षी चेहरा मानते हैं, जिसके पास मौजूदा शासन के बाद की स्पष्ट सोच और योजना है। रिपोर्ट के मुताबिक 2001 में उनकी छोटी बहन लीला लंदन में एक होटल के कमरे में मृत पाई गई थीं, जबकि 2011 में उनके छोटे भाई अली रजा ने अमेरिका में खुदकुशी कर ली थी। परिवार के मुताबिक पिता, देश और बहन को खोने का दर्द उनके भाई के लिए असहनीय साबित हुआ। आज रजा की एक ही सगी बहन फराहनाज़ हैं, जो अमेरिका में रहती हैं और सार्वजनिक जीवन से दूर हैं। वर्तमान में रजा पहलवी वाशिंगटन डीसी में रहते हैं। उन्होंने अमेरिका में पायलट की ट्रेनिंग ली और यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न कैलिफोर्निया से राजनीति विज्ञान की पढ़ाई की। वे ईरानी प्रवासी समुदाय के बीच बेहद सक्रिय हैं और कई देशों के नेताओं, सांसदों और नीति-निर्माताओं से मुलाकात करते रहते हैं। सोशल मीडिया पर उनकी मौजूदगी मजबूत है और वे अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ईरान में सत्ता परिवर्तन के लिए समर्थन मांगते हैं। बावजूद इसके विशेषज्ञों का एक वर्ग मानता है कि यह समर्थन विवादास्पद है। आलोचकों का कहना है कि ईरान की युवा पीढ़ी ने राजशाही का दौर देखा ही नहीं और विदेशी समर्थन, खासकर इजराइल से नजदीकी, उनकी विश्वसनीयता को कमजोर कर सकती है। पहलवी राजवंश का इतिहास भी विदेशी समर्थन से जुड़ा रहा है। 1921 में रजा खान पहलवी ब्रिटिश समर्थन से सत्ता में आए और 1925 से 1941 तक शासन किया। बाद में उनके बेटे मोहम्मद रजा शाह ने 1941 से 1979 तक राज किया, लेकिन 1979 की इस्लामी क्रांति ने इस राजवंश का अंत कर दिया। आज दशकों बाद, रजा पहलवी का नाम फिर से ईरान के राजनीतिक भविष्य की बहस में शामिल हो गया है सिराज/ईएमएस 14जनवरी26 ---------------------------------